Tuesday

सत्य घटना: ट्रेनों में रहें सतर्क...नहीं तो...

घटना कल शाम की है भोपाल से वापसी के समय जोधपुर भोपाल से अशोकनगर जाना उचित समझा यह गाड़ी शाम 5:25 पर भोपाल रेलवे स्टेशन से चलती है और लगभग 10:00 बजे तक अशोकनगर पहुंचा देती है। स्टेशन पहुंचा तो 5:10 से ऊपर का समय हो चुका था। जनरल डिब्बों में अधिक भीड़ होने के कारण रिजर्वेशन वाले डिब्बे में जाना उचित समझा क्योंकि मेरे पास टिकट साधारण यात्रा का ही था फिर भी यह सोच कर कि जब टीटी आएगा तो उसको अनुरोध करके डिफरेंस बनवाकर कोई ना कोई सीट या जगह बैठने के लिए ले लेंगे। गाड़ी का सतही तौर पर भ्रमण करने पर s3 मैं सीट नंबर 71 पर बैठ गया वह सीट खाली नजर आ रही थी अभी बैठा ही था की गाड़ी रेंगने लगी इस बीच में एक खाकी वर्दी पहने हुए पुलिस वाले सज्जन भी उसी सीट पर आकर बैठ गए।

मेरे सामने वाली सीट पर दो बुजुर्ग महिलाएं बैठी थी और उनके सामने वाली सीट पर एक दंपत्ति बैठे हुए थे जिनकी एक बिटिया भी जिसकी उम्र महज 12 या 13 वर्ष रही होगी यात्रा कर रही थी चूंकि TT नहीं आया था इसलिए मन में थोड़ी शंका थी कि वह आ जाए तो डिफरेंस बनवा लें और सीट पक्की कर लूं। मेरा रास्ता ज्यादा लंबा न था लेकिन फिर भी दिन भर की थकान के कारण मैं सोना चाहता था। ट्रेन में चलते-चलते सलामतपुर,गंजबासौदा, विदिशा और बीना तक का सफर कर लिया था लेकिन तब तक कोई टिकट देखने के लिए नहीं आया। वीना निकलने के बाद लोग अपने सोने की व्यवस्था बनाने लगे इतने में ही टीटी आ गया।

एक नंबर सीट से चेक करते करते जब तक 72वीं नंबर की सीट पर आया तब तक ट्रेन पिपरई तक पहुंचने वाली थी जैसे ही मैंने अपने साधारण टिकट दिखाइ तो उन्होंने पूछा कहां जाना है मैंने सोचा कि अगर इनको बोल दिया कि मुझे अशोकनगर जाना है तो यह अभी पेनल्टी बना देंगे इसलिए मैंने उनको बोला कि मुझे कोटा तक जाना है उन्होंने कहा फिर गुना में आपको सीट मिल सकती है। वहां की स्थिति देख कर ही बता पाऊंगा की सीट मिलेगी या नहीं मिलेगी तब भी आप डिफरेंस बनवा लीजिए।  मैंने कहा ठीक है बना दीजिए और मैंने अपनी जेब से पड़े हुए पैसे निकाले मेरे पास ₹12000 की समथिंग थे उन्ही में से मैंने एक नोट अचानक उनका मन बदल ओर उन्होंने कहा गुना चलकर बना दूंगा अभी रखे रहिए और इसी सीट पर बैठे रहना। अन्य लोगों की भी इसी तरह से टिकट चेक करते हुए वह दूसरे डिब्बे में चले गए।

हमारे सामने वाली सीट पर जो माताजी थीं उन्होंने अपना भोजन खोल लिया और हम सब को अपने साथ भोजन करने का ऑफर दिया लगभग सामने ना में सिर हिलाया तो उन्होंने दो केले निकालें और एक हमारे साथ बैठे हुए पुलिसवाले सज्जन को दे दिया दूसरा मुझे दिया और बोला यह खा लीजिए पुलिस वाले सज्जन ने आनन फानन में पूरा केला खा लिया मैंने अभी अपना केला खोला ही था कि मेरी नज़र एक बच्ची पर पड़ी वह मुझे देख रही थी मैंने आधा केला खुद खा लिया और आधा उस बच्ची को दे दिया इतने में अशोकनगर आ गया मैं गाड़ी से नीचे उतर आया।

भोजन को दरकिनार करते हुए मैं अपने घर तक आ गया। घड़ी की सुइयां 10:00 बजा रही थी और घर आकर मुझे ऐसा लगा जैसे चक्कर आ रहे हों

अभी बिस्तर पर बैठा ही था अचानक से मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला जबकि सुबह मुझे दो बहुत महत्वपूर्ण आयोजनों में जाना था जो कि आज सुबह ही होने थे।  इसके लिए मेरे मित्र हितेंद्र बुधौलिया ने मुझे सुबह 3:30 बजे से ही फोन लगाने आरम्भ किये चूंकि मुझे सही मायने में होश नहीं था जिसका कोई असर मेरे ऊपर नहीं हुआ लगभग 3:30 बजे से लेकर 9:30 बजे तक उन्होंने मुझे फोन किए जब कोई प्रत्युतर नहीं मिला तो फिर उनके सब्र का बांध भी टूट गया और वह मेरे घर की तरफ चल पड़े।

कमरा अंदर से बंद था बार-बार दरवाजा खटखटाने पर भी जब नहीं खुला तो उनके होश फाख्ता हो गए उन्होंने पुलिस को फोन लगाने का मन बनाया उस से पहले बहुत तेज से दरवाजे पर तीन चार प्रहर किए जिससे मेरी तंद्रा टूटी और मैं एक झटके से खड़ा हुआ वह दरवाजा खोल दिया फिर उसके बाद उनके शब्दों प्रश्नों की बौछार मेरे ऊपर होने लगी लेकिन मेरी आंखें खुली होने के बावजूद भी मुझे कुछ दिख नहीं रहा था चारों तरफ धुंधला-धुंधला था जब मैंने उनको यह बात बताई तो उन्होंने कहा कि सुबह हो ज्यादा समय तक आंखें धो लीजिए और जैसे ही मैंने पानी से आंखें धोया उसके बाद ब्रश मुँह के अंदर रखा तो जैसे मुझे करंट लग गया हो मेरे पूरे मुंह में छाले के होंठ फट चुके थे होठ के ऊपर कई दाने निकल आए थे मेरी समझ में नहीं आ रहा था क्या हुआ डॉक्टर से सलाह करने पर यह पता चला कि मुझे जहर दिया गया है जब मुझसे पूछा गया कि आपने क्या खाया तो सिवाय उसके केले मैंने कुछ नहीं खाया था।

अब मेरा ध्यान ट्रेन में बैठी उन बुजुर्ग महिलाओं पर था मैं सोच रहा था कि उन पुलिसवाले सज्जन का क्या हुआ होगा जिन्होंने पूरा केला खाया उस बच्ची का क्या हुआ होगा जिसमें आधा केला खाया जब आधा केले में मेरी यह स्थिति है तो उनके साथ क्या गुजरा होगा मैं जाने अनजाने में जहरखुरानी का शिकार हो चुका था और स्थिति यह रही कि मैं पूरे दिन लगभग अनमना ही रहा।

Thursday

लालटेन की रोशनी में हुआ था राष्ट्रपिता का ऑपरेशन

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में लोगों को काफी जानकारी है, लेकिन यह शायद ही अधिक लोगों को पता होगा कि एक बार गांधी जी के ऑपरेशन के वक्त अचानक बिजली चली गई थी और फिर ब्रिटिश सर्जन ने लालटेन की रोशनी में ऑपरेशन पूरा किया था। 
जानकारी के अनुसार अंग्रेजी हुकुमत के समय महात्मा गांधी को 1922 में राजद्रोह के एक मामले में 6 साल की सजा सुनाई गई थी। सजा काटने के लिए उन्हें पुणे की येरवडा जेल में रखा गया था। जेल में ही गांधीजी तो अपेंडिस हो गया। मेडिकल जांच के बाद गांधी जी ऑपरेशन कराने की सलाह चिकित्सक ने दी थी। ससून हॉस्पिटल में जब उनका ऑपरेशन हो रहा था, तभी लाइट चली गई थी और फिर लालटेन की रोशनी में ऑपरेशन पूरा हुआ था। 

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ये कैसी मां... बेटियों से ही मांग ली परवरिश की कीमत

छिंदवाड़ा में पति-पत्नी के आपसी विवाद और अलगाव का खमियाजा किस तरह से बच्चों को भुगतना पड़ता है बुधवार को बाल कल्याण समिति के सामने आए एक मामले में यह देखा जा सकता है। पति-पत्नी दोनों घरेलू विवाद के बाद अलग हो चुके हैं। उनकी दो बेटियां हैं। पिता दोनों बेटियों को अपने साथ भोपाल ले गया।
बेटियों की इच्छा थी कि मां-पिता में सुलह हो जाए तो सब साथ रहें, लेकिन दोनों में अलगाव इस कदर था कि पिता बच्चियों की मां को रखने को तैयार नहीं है। पिता से जिद कर शुक्रवार को दोनों बच्चियां भोपाल से पांढुर्ना मां से मिलने निकली थीं। इधर पिता ने साफ कर दिया कि वापस आना तो अकेली ही आना, वरना मत आना। इधर दोनों बच्चियां मां के पास पांढुर्ना पहुंचीं तो मां ने कहा कि पिता से भरण-पोषण का खर्चा मांगो तो ही साथ रखूंगी। हारकर दोनों बच्चियां पांढुर्ना थाने पहुंचीं और पुलिस को बात बताई। पुलिस ने भोपाल उसके पिता का नाम पता और नम्बर लेकर फोन किया और छिंदवाड़ा बुलवाया। नाबालिग बच्चियों के मामले को छिदंवाड़ा जिला मुख्यालय स्थित बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पिता बुधवार को समिति के सामने आया।

शादी के एक माह बाद मौत, फिर भी चार नए रूप में जिंदा है यह शख्स

नागपुर के नरखेड़ निवासी श्यामसुंदर कलंबे मौत के बाद भी चार रूप में जिंदा है। दरअसल, श्यामसुंदर की वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने के महज तीन दिन बाद ही मौत हो गई। परिजन ने मरणोपरांत उनकी देहदान करने की अनुकरणीय पहल की है। उनकी मौत के बाद परिजन ने उनका हृदय, दोनों किडनी और लीवर दान कर चार लोगों को नई जिंदगी दी है।
जानकारी के अनुसार 34 वर्षीय श्यामसुंदर दिल्ली की डीन ठक्कर कंस्ट्रक्शन कम्पनी में एकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे। युवा अवस्था में ही उनकी 22 जून को दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनके पार्थिव देह के अंतिम दर्शन करने के लिए शहर में उनके चाहने वालों की भारी भीड़ जुटी। श्यामसुंदर का विवाह 22 मई 2017 को सावरगांव के गिरडकर परिवार की पल्लवी से हुआ था।

Wednesday

सावधान ! यहाँ तैयार होता है नकली बीज

महाकौशल और विदर्भ में इन दिनों मानसून सक्रिय है। किसान बोवनी में व्यस्त है और मौके का फायद उठाकर कई दुकान प्रतिबंधित धान बीज बेच रहे हैं। बालाघाट जिले में कार्रवाई के दौरान ऐसे प्रकरण प्रकाश में भी आ चुके हैं। 
उल्लेखनीय है कि बीज उत्पादक कंपनियों की गड़बडिय़ों का मामला पहले से ही चर्चा में है। कांग्रेस राकांपा की सरकार के समय विदर्भ की कुछ बीज कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन प्रतिबंधित बीजों की अब भी खपत हो रही है। इसी कड़ी में विदर्भ जन आंदोलन समिति के संयोजक किशोर तिवारी ने कहा है कि इन कम्पनियों की जांच के बारे में महाराष्ट्र सरकार से निवेदन किया गया है। सरकार की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। 

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पेट्रोल पम्पों पर ऐसे कट रही आपकी जेब

उपभोक्ताओं से ठगी कोई नहीं बात नहीं है, लेकिन अब हद यह हो गई कि मशीनरी से छेडख़ानी कर उपभोक्ताओं की आंखों के सामने उन्हें चपत लगाई जा रही है। कुछ पेट्रोल पम्प संचालकों ने मशीनों में माइक्रोचिप के जरिए गड़बड़ी की है और ग्राहकों को प्रत्येक पांच लीटर पेट्रोल पर 200 से 220 मिलीलीटर पेट्रोल कम दिया जा रहा है। इस तरह की ठगी का मामला पड़ोसी जिले नागपुर में सामने आया है।

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Tuesday

मां ने सात बार रचाई 21 साल की बेटी की शादी


पैसे की लालच में इंसान कितना गिर सकता है, इसका आज के समय में कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। आलम यह है कि अब मां, बेटी जैसे पवित्र रिश्ते कलंकित हो रहे हैं। विश्वास के नाम पर धोखा किया जा रहा है।
ऐसा ही एक मामला विदर्भ के भंडारा में सामने आया है। दरअसल, भंडारा के ग्राम लाखनी में एक महिला अपनी ही 21 वर्षीय बेटी की छह सालों में छह शादियां कर चुकी थी और सातवीं रचाने जा रही थी। 
मां की करतूतों से तंग आकर पीडि़त युवती ने पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने पीडि़ता की शिकायत पर आरोपी महिला और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। महिला सातवीं बार लड़की की शादी कराने की तैयारी में थी।

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मां-बाप के साथ उठी होनहार बेटे की अर्थी






सौंसर क्षेत्र के जाम गांव में एक परिवार पर प्राकृति आफत ऐसी गिरी कि भाई-बहन के सिर से मां-बाप का हाथ उठ गया। साथ ही छोटे भाई को भी खो दिया। मंगलवार को गमगीन माहौल में तीन शवों की अर्थी जब निकली तो हर आंख रो पड़ी। रोते बिलखते हुए बेटे पवन और बेटी प्रीति बंसोड़ ने एक साथ पिता युवराज, मां अंतकलाबाई और छोटे भाई अंकित को अंतिम विदाई दी। जाम में हुई दर्दनाक घटना का दर्द हर ग्रामवासी और आने वाले व्यक्ति के चहरे पर साफ़ नजर आ रहा था। माहौल और गमगीन तब हो गया जब एक साथ मोक्षधाम के लिए तीनों अर्थियां नकलीं, हर किसी के आंख से आसू टपक रहे थे।



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Monday

GST : कौन-कौन सी वस्तुएं और कितनी होंगी महंगी



0% GST Rates Items 
गेहूं, चावल, दूसरे अनाज, आटा, मैदा, बेसन, चूड़ा, मूड़ी (मुरमुरे), खोई, ब्रेड, गुड़, दूध, दही, लस्सी, खुला पनीर, अंडे, मीट-मछली, शहद, ताजी फल-सब्जियां, प्रसाद, नमक, सेंधा/काला नमक, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, पान के पत्ते, गर्भनिरोधक, स्टांप पेपर, कोर्ट के कागजात, डाक विभाग के पोस्टकार्ड/लिफाफे, किताबें, स्लेट-पेंसिल, चॉक, समाचार पत्र-पत्रिकाएं, मैप, एटलस, ग्लोब, हैंडलूम, मिट्टी के बर्तन, खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार, बीज, बिना ब्रांड के ऑर्गेनिक खाद, सभी तरह के गर्भनिरोधक, ब्लड, सुनने की मशीन।

5% GST Rates Items 
ब्रांडेड अनाज, ब्रांडेड आटा, ब्रांडेड शहद, चीनी, चाय, कॉफी, मिठाइयां, *खाद्य तेल,* स्किम्ड मिल्क पाउडर, बच्चों के मिल्क फूड, रस्क, पिज्जा ब्रेड, टोस्ट ब्रेड, पेस्ट्री मिक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन फल-सब्जियां, पैकिंग वाला पनीर, ड्राई फिश, न्यूजप्रिंट, ब्रोशर, लीफलेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस, झाडू, क्रीम, *मसाले,* जूस, साबूदाना, जड़ी-बूटी, लौंग, दालचीनी, जायफल, जीवन रक्षक दवाएं, स्टेंट, ब्लड वैक्सीन, हेपेटाइटिस डायग्नोसिस किट, ड्रग फॉर्मूलेशन, क्रच, व्हीलचेयर, ट्रायसाइकिल, लाइफबोट, हैंडपंप और उसके पार्ट्स, सोलर वाटर हीटर, रिन्यूएबल एनर्जी डिवाइस, ईंट, मिट्टी के टाइल्स, साइकिल-रिक्शा के टायर, कोयला, लिग्नाइट, कोक, कोल गैस, सभी ओर (अयस्क) और कंसेंट्रेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस।

12% GST Rates Items 
 नमकीन, भुजिया, *बटर ऑयल, घी*, मोबाइल फोन, ड्राई फ्रूट, फ्रूट और वेजिटेबल जूस, सोया मिल्क जूस और दूध युक्त ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन मीट-मछली, अगरबत्ती, कैंडल, आयुर्वेदिक-यूनानी-सिद्धा-होम्यो दवाएं, गॉज, बैंडेज, प्लास्टर, ऑर्थोपेडिक उपकरण, टूथ पाउडर, सिलाई मशीन और इसकी सुई, बायो गैस, एक्सरसाइज बुक, क्राफ्ट पेपर, पेपर बॉक्स, बच्चों की ड्रॉइंग और कलर बुक, प्रिंटेड कार्ड, चश्मे का लेंस, पेंसिल शार्पनर, छुरी, कॉयर मैट्रेस, एलईडी लाइट, किचन और टॉयलेट के सेरेमिक आइटम, स्टील, तांबे और एल्यूमीनियम के बर्तन, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल और पार्ट्स, खेल के सामान, खिलौने वाली साइकिल, कार और स्कूटर, आर्ट वर्क, मार्बल/ग्रेनाइट ब्लॉक, छाता, वाकिंग स्टिक, फ्लाईएश की ईंटें, कंघी, पेंसिल, क्रेयॉन।

18% GST Rates Items
हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉर्न फ्लेक्स, पेस्ट्री, केक, जैम-जेली, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड, शुगर कन्फेक्शनरी, फूड मिक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स कंसेंट्रेट, डायबेटिक फूड, निकोटिन गम, मिनरल वॉटर, हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो, रजिस्टर, अकाउंट बुक, नोटबुक, इरेजर, फाउंटेन पेन, नैपकिन, टिश्यू पेपर, टॉयलेट पेपर, कैमरा, स्पीकर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, हेलमेट, कैन, पाइप, शीट, कीटनाशक, रिफ्रैक्टरी सीमेंट, बायोडीजल, प्लास्टिक के ट्यूब, पाइप और घरेलू सामान, सेरेमिक-पोर्सिलेन-चाइना से बनी घरेलू चीजें, कांच की बोतल-जार-बर्तन, स्टील के ट-बार-एंगल-ट्यूब-पाइप-नट-बोल्ट, एलपीजी स्टोव, इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर, ऑप्टिकल फाइबर, चश्मे का फ्रेम, गॉगल्स, विकलांगों की कार।

28% GST Rates Items 
कस्टर्ड पाउडर, इंस्टैंट कॉफी, चॉकलेट, परफ्यूम, शैंपू, ब्यूटी या मेकअप के सामान, डियोड्रेंट, हेयर डाइ/क्रीम, पाउडर, स्किन केयर प्रोडक्ट, सनस्क्रीन लोशन, मैनिक्योर/पैडीक्योर प्रोडक्ट, शेविंग क्रीम, रेजर, आफ्टरशेव, लिक्विड सोप, डिटरजेंट, एल्युमीनियम फ्वायल, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिश वाशर, इलेक्ट्रिक हीटर, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, प्रिंटर, फोटो कॉपी और फैक्स मशीन, लेदर प्रोडक्ट, विग, घड़ियां, वीडियो गेम कंसोल, सीमेंट, पेंट-वार्निश, पुट्टी, प्लाई बोर्ड, मार्बल/ग्रेनाइट (ब्लॉक नहीं), प्लास्टर, माइका, स्टील पाइप, टाइल्स और सेरामिक्स प्रोडक्ट, प्लास्टिक की फ्लोर कवरिंग और बाथ फिटिंग्स, कार-बस-ट्रक के ट्यूब-टायर, लैंप, लाइट फिटिंग्स, एल्युमिनियम के डोर-विंडो फ्रेम, इनसुलेटेड वायर-केबल।


पहले बर्थ-डे पर बेटे ने दी शहीद पिता को मुखाग्नि

अब तक आपने सुना होगा कि पहले बर्थ-डे पर पिता ने बेटे को महंगा गिफ्ट, साइकिल या अन्य सौगात दी। लेकिन यहां पहले जन्मदिन पर मासूम को अपने शहीद पिता की चिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। उसे तो यह भी बोध नहीं होगा कि वह कौन-सी रस्म निभा रहा है। 
आतंकियों के हमले में गुरुवार को शहीद हुए नायक संदीप जाधव का शनिवार को औरंगाबाद के केलगांव में अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार को उनके बेटे का पहला जन्मदिन था और उसने अपने हाथों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। 

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यहां नहीं करते अंतिम संस्कार, होता है कुछ ऐसा कि मुर्दों में फिर आ जाती है जान

कुछ देशों में परम्परा रही है कि व्यक्ति के मरने के बाद उसके शव की ममी बनाकर सुरक्षित रख दिया जाता हैै। जबकि शेष स्थानों पर शव को नष्ट करने के विभिन्न तरीके अपनाए जाते हैं। लेकिन मध्यप्रदेश के इन गांवों में शव के साथ कुछ ऐसा किया जाता है जो कभी कोई सोच भी नहीं सकता। जानकारों का कहना है कि इन गांवों में शव को न तो जलाया जाता है न ही दफनाया जाता है। शव को किसी गुफा में उनकी प्रिय वस्तुओं के साथ रख दिया है। क्योंकि यहां मरने के बाद भी जीवन का अंत नहीं माना जाता है। मरने के बाद जब शव को गुफा में रखा जाता है वह उसके नए जीवन की शुरुआत होती है। 

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मां-बाप के शवों से लिपटी गई दोनों मासूम बेटियों की देह, फिर जलाई गई चिता

जब चार और सात साल की दोनों मासूम बेटियों के साथ माता-पिता की अर्थी उठी तो मौजूद हर आंख से आंसू बह रहे थे। रास्ते में भी जिसकी नजर इस शव यात्रा पर पड़ी वह स्तब्ध रह गया।
श्रीनगर के गुलमर्ग में हादसे का शिकार हुए प्रोफेसर अंड्रस्कर परिवार के चारों शवों का नागपुर में सोमवार को अंतिम संस्कार हुआ गया। गुलमर्ग की गोंडोला राइड पर गए प्रा. जयंत अंड्रस्कर (42) उनकी पत्नी मनीषा (38) और बेटी जानवी (7) एवं अनघा (4) रविवार को दुर्घटना का शिकार हुए थे। मनीषा से लिपटी अनघा और जयंत से लिपटी जानवी को मोक्षधाम घाट ले जाया गया। जयंत के बड़े भाई सतीष ने चारों को मुखाग्नि दी। 


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ईद मुबारक

हमको
तुमको,
एक-दूसरे की बाहों में
बँध जाने की
ईद मुबारक।
बँधे-बँधे,
रह एक वृंत पर,
खोल-खोल कर प्रिय पंखुरियाँ
कमल-कमल-सा
खिल जाने की,
रूप-रंग से मुसकाने की
हमको,
तुमको
ईद मुबारक।
और
जगत के
इस जीवन के
खारे पानी के सागर में
खिले कमल की नाव चलाने,
हँसी-खुशी से
तर जाने की,
हमको,
तुमको
ईद मुबारक।
और
समर के
उन शूरों को
अनुबुझ ज्वाला की आशीषें,
बाहर बिजली की आशीषें
और हमारे दिल से निकली-
सूरज, चाँद,
सितारों वाली
हमदर्दी की प्यारी प्यारी
ईद मुबारक।
हमको,
तुमको
सब को अपनी
मीठी-मीठी
ईद-मुबारक।

- केदारनाथ अग्रवाल

Sunday

बिना गिफ्ट शादी में मत जाना


एक बार की बात है कि गुप्ताजी, एक मारवाड़ी (बनिये) के यहां शादी में गए। शादी का पंडाल बड़ा भव्य था और उसमें अंदर जाने के लिए 2 दरवाजे थे।
एक दरवाजे पर रिश्तेदार, दूसरे पर दोस्त लिखा था।
गुप्ताजी, बड़े फख्र से दोस्त वाले दरवाजे से अंदर
गए।
आगे फिर 2 दरवाजे थे,
एक पर महिला, दूसरे पर पुरुष लिखा था।
गुप्ताजी पुरुष वाले दरवाजे से अंदर गए।
वहां भी 2 दरवाजे और थे,
एक पर गिफ्ट (gift) देने वाला,
दूसरे पर बिना गिफ्ट (without-gift) वाले लिखा था।
गुप्ताजी को हर बार अपनी मर्जी के दरवाजे से अंदर जाने में बड़ा मजा आ रहा था। उसने ऐसा इंतजाम पहली बार देखा था |
गुप्ताजी बिना-गिफ्ट (without-gift) वाले दरवाजे से अंदर चले गए।
जब अंदर जाकर देखा तो गुप्ताजी बाहर
गली में खड़े थे।
और वहॉं लिखा था… शर्म तो आ नहीं
रही होगी,
बनिये की शादी और मुफ्त (free) मे
रोटी खायेगा?
जा-जा बाहर जा और हवा खा।


Saturday

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं

नोबेल पुरस्कार विजेता स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा की कविता  "You  Start  Dying  Slowly" का हिन्दी अनुवाद...

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप
करते नहीं कोई यात्रा,
पढ़ते नहीं कोई किताब,
सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,
करते नहीं किसी की तारीफ़।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
जब आप :
मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,
नहीं करने देते मदद अपनी और न ही करते हैं मदद दूसरों की।

 आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप :
बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,
चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,
नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम व्यवहार,
नहीं पहनते हैं अलग-अलग रंग, या
आप नहीं बात करते उनसे जो हैं अजनबी अनजान।

 आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप :
नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को,
और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को,
वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें,
और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को।

आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप :
नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को,
जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,
अग़र आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,
अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,
अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को,
अपने जीवन में कम से कम एक बार,
किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की...।
तब आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं...!


Friday

तिल तिल कर मरा कर्ज के तले दबा किसान

छिंदवाड़ा जिले के ग्राम कचराम निवासी किसान श्याम यदुवंशी ने अपने खेत में कीटनाशक पीकर जान दे दी। किसान द्वारा आत्महत्या का मामला कोई सामान्य घटना नहीं है। जिन परिस्थितियों में किसान श्याम यदुवंशी ने आत्महत्या की वह दिल दहलाने वाली घटना है। श्याम को तिल-तिल मरने पर मजबूर किया गया। पहले बैंक के कर्मचारी और अधिकारी उसके घर गए, लोन की रकम चुकाने के लिए उस पर दबाव बनाया। तरह तरह की यातनाएं दी गईं। गांव वालों के सामने जलील किया गया। यहां तक बैंक अधिकारियों ने कह डाला कि अगर तुम लोन की रकम नहीं चुका सकते तो तुम्हें डूब मरना चाहिए। किसान श्याम यदुवंशी को यातनाएं देने का सिलसिला यहीं नहीं थमा। बिजली वितरण कंपनी के कर्मचारी बकाया बिजली बिल वसूले गए, किसान ने तुरंत बिजली बिल न दे पाने की असमर्थता जताई। बिजली वितरण कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा भी उसे परेशान किया गया। घर से समान उठा ले जाने की धमकी दी गई है। 300000 से अधिक कर्ज ले चुका किसान ऐसे में क्या करता है। उसे कहीं भी उम्मीद की किरण नजर नहीं आई। अगर कहीं से भी उसे जिंदगी की आस दिखाई देती तो आज श्याम हमारे बीच होता मरता नहीं। कीटनाशक पीने के बाद गंभीर अवस्था में किसान श्याम को जिला अस्पताल छिंदवाड़ा लाया गया। जिला अस्पताल में भी अगर समुचित इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच जाती। डॉक्टर ने इलाज तो दूर उसे देखना भी मुनासिब नहीं समझा। नर्सों के भरोसे गंभीर किसान को छोड़ दिया गया। आखिरकार किसान जिंदगी की जंग हार गया और उसकी सांसे टूट गईं और वह हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा हो गया। किसान के सामने 12 महीने विपरीत परिस्थितियां होती हैं। महंगे बीज, खाद और अन्य पदार्थ लेकर वह खेती करता है। प्राकृतिक आपदा और अन्य विपरीत परिस्थितियों के बावजूद फसल तैयार करता है। जब फसल पक कर तैयार हो जाती है तो उसका उचित दाम नहीं मिलता। कई बार तो फसल की लागत भी किसान को नहीं मिल पाती है। व्यापारी भी मौके का फायदा उठाते हैं। बड़े पैमाने पर उत्पाद होने के कारण फसल की अच्छी कीमत नहीं देते। ऐसे में किसान को अपनी फसल औने-पौने दाम बेचनी पड़ती है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को किसानों के लिए दीर्घकालीन योजना बनानी पड़ेगी ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके और वह भी आम लोगों की तरह जीवन जी सके।