Friday

एक खुला खत आतंकवादियों के नाम

प्रिय महानुभावो, इस खत का मकसद उन गलतफहमियों को दूर करना है जो हमारे और आपके बीच हैं। जयपुर, बेंगलुरु, अहमदाब

ाद, दिल्ली और अब गुवाहाटी - हाल के इन आतंकी हमलों से यह एकदम साफ है कि आपके दिलों में बेहद गुस्सा है। गुस्सा हमारे दिलों में भी बहुत है। पिछले छह दशकों से हर पांचवें साल चुनाव के कुछ हफ्तों के दौरान हमारे इस गुस्से की वजहें भूख, बेरोजगारी, बिजली, सड़क आदि मुद्दों के रूप में सामने आती रही हैं। लेकिन, यह चर्चा फिर कभी।

सच बताएं तो कटे-फटे शरीर, बिखरे खून की तस्वीरें हमें विचलित कर देती हैं। यह खून आम आदमी का होता है, जो हर पांच साल के बाद आने वाले उस एक दिन के लिए जीता है, जब वह लंबी कतारों में खड़े होकर शांति से वोट देने के लिए अपनी बारी का इंतजार करता है। बाकी के दिन वह गलियों में रेंगता रहता है, क्योंकि मुख्य सड़कें प्राय: उन लोगों के काफिलों के लिए रिज़र्व रहती हैं जिन्हें वोट देकर वह सत्ता में पहुंचाता है।

मुझे पक्का यकीन है कि आपलोग हमारे ही आसपास के होंगे। आप भी उन स्कूलों में से किसी में जरूर गए होंगे जिन पर इस देश को इतना नाज़ है। जहां, शिक्षक अगर हों तो वे ऊंघते होते हैं, फर्नीचर हो तो वह टूटा-फूटा होता है, खाना हो तो वह सड़ा-गला होता है और मकान हो तो वह जर्जर होता है। उससे पहले आप लोग भी हमारे बीच ही पल-बढ रहे होंगे, जब नफरत ने आपको जकड़ लिया और आप वह बन गए जो कि आज आप हैं।

आश्चर्य नहीं कि आप हमारे बारे में इतनी सारी बातें इतने अच्छे से जानते हैं। लेकिन, मैं आपको एक जरूरी बात बताना चाहता हूं। आप गलत लोगों को निशाना बना रहे हैं। हम लोग नाचीज़ हैं। हमारे खून का कोई रंग नहीं। हमारी जिंदगी का भी कोई मोल नहीं है। जिस दिन हम अपना प्रतिनिधि चुन लेते हैं, बस उसी दिन से हम जीना छोड़ देते हैं। उसके बाद से हमारे प्रतिनिधि ही जीते हैं। हालांकि, हम मरते नहीं, क्योंकि हमें पांच साल के बाद फिर वोट देना होता है और इस दौरान तरह-तरह के टैक्स भी चुकाते रहना होता है।

हमारी कोई सुरक्षा नहीं, लेकिन हमारे प्रतिनिधि चौबीसो घंटे कड़ी सुरक्षा में रहते हैं। हम अपना प्रतिनिधि इसलिए चुनते हैं ताकि वे हमारी शिकायतें सुन सकें। अगर आपको हम आम लोगों से कोई शिकायत है तो कृपया उनसे मुखातिब हों। उनका पता? सबसे आलीशान इलाकों की सबसे आलीशान इमारतें।

अग्रिम धन्यवाद
एक आम आदमी
साभार-नवभारतटाइम्स.कॉम

Thursday

यह नहीं है मेरा गांव

  • मंतोष कुमार सिंह
बरसों बाद गया गांव
गलियों से हो गया अंजान
बदल गया था नक्शा
गांव का
पगडंडिया, खरंजे, खेतों के मेढ़
सबकी बदल गई थी तस्वीर
अलकतरे की लेप पर चलते हैं लोग
अब पप्पू, सोनू, मोनू और गोलू
नहीं खेलते ओल्हा-पत्ती
बगीचों में खड़ी हैं बिल्डिंगें
नहीं होता गुल्ली-डंडा
नहीं होता डागा दौड़
क्रिकेट होता चारो ओर
काकी, ईया, काका, बाबा
नहीं दिखते खाट पर
टांगा और बैल गाड़ी
नहीं दौड़ती सडक़ों पर
डाकिया भी नहीं दिखता
झोले में संदेशा लेकर
हर हाथ में मोबाइल
हर गलियों में मोटरसाइकिल
यह नहीं है मेरा गांव

Wednesday

घृणा की राजनीति की बलि चढ़ा धर्मदेव

उत्तर प्रदेश के पिछड़े संतकबीर नगर जिले से रोजी रोटी की तलाश में मुम्बई गए धर्मदेव राय को क्या पता था कि वह घृणा की राजनीति की भेंट चढ़ेगा और दीपावली और छठ पर्व के लिये घर जाने निकले उस युवक की यात्रा श्मशान घाट पर खत्म होगी। तीन दिन पहले मुम्बई में कथित पुलिस मुठभेड़ में बिहार की राजधानी पटना के राहुल राज की मौत की हलचल खत्म भी नहीं हो पायी थी कि नवी मुम्बई के वाशी इलाके में रहने वाला धर्मदेव की पिटाई से हुई मौत से घृणा के भाव को कुछ और बढ़ा दिया। राहुल राज की कथित मुठभेड़ पर मुम्बई पुलिस ने अपना पीठ थपथपाई थी तथा महाराट्र के राजनीतिक दलों ने भी इसे सही कदम ठहराया था लेकिन अब धर्मदेव की हत्या के मामले में कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। न तो मुम्बई पुलिस और न शिवसेना या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसे घृणा की राजनीति करने वाले दल। धर्मदेव मंगलवार को अपने घर आने के लिये ट्रेन पकडऩे लोकमान्य तिलक टॢमनस आ रहा था। मुम्बई की जीवन रेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन के जिस डिब्बे में वह सवार था उसमें कुछ ऐसे तत्व भी बैठे थे जो कुछ राजनीतिक दल और नेताओं के इशारे पर उत्तरभारतीयों को अपना दुश्मन मान रहे थे। बात-बात में उन सभी लोगों ने उसकी तथा उसके तीन और साथियों की पिटाई शुरू कर दी। धर्मदेव को इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गयी तथा उसके तीनों दोस्त बुरी तरह से जख्मी हो गये। दुखदायी तो यह था कि धर्मदेव के परिवार वालों को उसका शव देखना भी नसीब नहीं हुआ। उसके दोस्तों तथा कुछ और लोगों ने उसका कल मुम्बई में ही अंतिम संस्कार कर दिया। धर्मदेव के बड़े भाई ब्रहम्देव राय ने कहा कि उसके मौत की खबर आने के बाद मां बाप और उसकी पत्नी सन्न है। धर्मदेव की पत्नी दीपमाला की आंखों से तो आंसू रूकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। वह गर्भवती भी है। उन्होंनें कहा कि मेरे भाई की हत्या से मुम्बई में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के लोगों में दहशत फैल गयी है और सब अपने आप को मौत के बीच घिरा पा रहे हैं। केन्द्र सरकार यह साफ करे कि वह क्या चाहती है। यदि वह मुम्बई में रहने वाले उत्तर भारतीयों की सुरक्षा नहीं कर सकती है तो मुम्बई समेत पूरे महाराष्ट्र में जाने वाले उत्तर भारतीयों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिये। उन्होंनें कहा कि धर्मदेव के साथ जिन तीन लोगों की पिटाई की गयी वह सभी संतकबीर नगर जिले के ही रहने वाले हैं। धर्मदेव का अंतिम संस्कार भी उन तीनों ने अन्य लोगों की मदद से किया।

Monday

ऐसे पाएं मां लक्ष्मी की कृपा

दीपावली पूजन के समय मां लक्ष्मी की एक पुरानी तस्वीर पर महिलाएं अपने हाथ से संपूर्ण सुहाग सामग्री अर्पित करें। अगले दिन स्नान के बाद पूजा करके उस सामग्री को मां लक्ष्मी का प्रसाद मानकर स्वयं प्रयोग करें तथा मां लक्ष्मी से अपने घर में स्थायी वास की प्रार्थना करें। इससे मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।

आर्थिक स्थिति में उन्नति के लिए दीपावली की रात सिंह लग्न में श्रीसूक्त का पाठ करें। श्रीसूक्त में 15 ऋचाएं हैं। प्रत्येक ऋचा अति शक्तिशाली होती है। सिंह लग्न मध्य रात्रि में होता है। उस समय लाल वस्त्र धारण करके लाल आसन पर बैठ कर लक्ष्मी जी की तस्वीर के सामने शुद्ध घी का बड़ा दीपक जलाएं। श्रीसूक्त का 11 बार पाठ करें। फिर हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करें और श्रीसूक्त की प्रत्येक ऋचा के साथ आहुति दें। तत्पश्चात् थोड़ा जल आसन के नीचे छिड़कें और उस जल को माथे पर लगाएं।

दीपक को दोनों हाथों में लेकर अपने निवास स्थान के ऐसे स्थान पर आ जाएं , जहां से आकाश दिखाई देता हो। वहां मां लक्ष्मी से अपने घर की समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। फिर उस दीपक को लेकर पूरे घर में घूम जाएं और अन्त में उसे पूजा स्थल में रख दें। इस प्रयोग से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं। इसके बाद प्रत्येक शुक्ल पक्ष की पंचमी को श्रीसूक्त से हवन करें।

लक्ष्मी विष्णुप्रिया हैं। दीपावली पूजन के समय गणेश - लक्ष्मी के साथ विष्णु जी की स्थापना अनिवार्य है। लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर विष्णु जी तथा बाईं ओर गणेश जी को रखना चाहिए।

दीपावली के दिन पीपल का एक अखंडित पत्ता वृक्ष से प्रार्थना करके तोड़ लाएं और इसे पूजाघर अथवा किसी अन्य पवित्र स्थान पर रख दें। फिर प्रत्येक शनिवार को नया पत्ता तोड़कर उस स्थान पर रखें और पुराने पत्ते को पेड़ के नीचे रख आएं , घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होगा।

लक्ष्मी समुद्र से उत्पन्न हुई हैं। समुद्र से ही उत्पन्न दक्षिणावर्ती शंख , मोती शंख , कुबेर पात्र , गोमती चक्र आदि उनके सहोदर अर्थात भाई - बंधु हैं। इनकी आपके घर में उपस्थिति हो , तो लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर घर आती हैं। अत : दीपावली पूजन में इन वस्तुओं में से जो भी संभव हो , उसे घर में रखें। लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्त होगी।
नवभारत टाइम्स

Sunday

दीपावली की हार्दिक शुभकामानायें


ये दिवाली आपके जीवन में सुख समृद्धि लाये, हर तरफ हरियाली हो, हर तरफ प्यार की बरसात हो,भाईचारा बना रहे

Saturday

हरे सोने की खान 'शैवाल'

ईंधन के विकल्प के तौर पर जैव ईंधन में सम्भावनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। जटरोफा (रतनजोग), नारियल व सोयाबीन से जैव ईंधन निकालने में सफलता मिलने के बाद अब तालाब व गड्ढ़े-नाले में जमने वाली काई (शैवाल) में भी वैज्ञानिक ईंधन की महक देख रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक शैवाल का 50 फीसदी हिस्सा र्ईंधन होता है और इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि यह निकट भविष्य में हरे सोने की खान साबित हो।इतना ही नहीं, वैज्ञानिक 'शैवाल र्ईंधन' को दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन का दर्जा दे रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें पिछले जैव ईंधन के विकल्पों की तरह समस्याएं सामने नहीं आएंगी, जैसे कि विशेषज्ञों द्वारा जटरोफा से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर दूरगामी प्रतिकूल असर पडऩे की आशंका हो या फिर कृषि योग्य भूमि व सिंचाई के लिए जल की समस्या हो। क्योंकि, शैवाल बंजर जमीन पर गंदे-खारे पानी में ही उपजती है। साथ ही इसमें अन्य विकल्पों की बनस्पत प्रति हैक्टेयर छह से दस गुना अधिक र्ईंधन व ऊर्जा के उत्पादन की सम्भावना भी है। कार्बन डाई आक्साइड (सीओ2) के उत्सर्जन को कम करने व ऊर्जा के संतुलित विकल्प के लिए कार्य करने वाली ब्रिटेन की सरकारी अनुदान प्राप्त स्वायत्त संस्था 'कार्बन ट्रस्ट' ने शैवाल ईंधन के निर्माण की दिशा में पहल करते हुए लाखों पाउण्ड की परियोजना शुरू भी कर दी है। परियोजना का लक्ष्य सन् 2020 तक शैवाल को पेट्रोलियम ईंधन का एक बेहतर विकल्प बनाना है। ट्रस्ट के निदेशक मार्क विलियमसन के मुताबिक शैवाल ईंधन सडक़ व वायु परिवहन में पेट्रोलियम खपत के एक बड़े हिस्से की पूर्ति कर सकता है। साथ ही इससे हर वर्ष दुनिया भर में 16 करोड़ टन कार्बन डाई आक्साइड के उत्सर्जन को कम किया जा सकेगा। विशेषज्ञ यह भविष्यवाणी भी कर रहे हैं कि सन् 2030 तक यह विश्व की कुल विमान र्ईंधन खपत का 12 फीसदी हिस्सा पूरा कर सकता है। फिलहाल, वैज्ञानिकों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए शैवाल ईंधन का उत्पादन औद्योगिक पैमाने पर कैसे किया जाए? साथ ही यह चुनौती भी है कि शैवाल र्ईंधन को अधिक से अधिक किफायती कैसे बनाया जाए? उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में पेट्रोलियम संसाधन की घटती मात्रा व ईंधन की बढ़ती कीमत के मद्देनजर जैव ईंधन को भविष्य के एक बेहतर ऊर्जा विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। जैव ईंधन (बायो फ्यूल) को 'ग्रीन ऑयल' भी कहा जा रहा है और इसे टिकाऊ परिवहन ईंधन माना जा रहा है।

हेलमेट पहना तो गुलाब, नहीं तो...

उड़ीसा की राजधानी में अब हेलमेट पहनना काफी फायदेमंद साबित होने वाला है क्योंकि अब हेलमेट पहनने वालों को एक खूबसूरत लड़की से गुलाब मिलेगा। वहीं जिन लोगों को हेलमेट के बिना पकड़ा गया उन्हें वो लड़की राखी बांधकर भैया बना लेगी।
ये उड़ीसा की ट्रैफिक पुलिस की एक नई स्कीम है जो इसके जरिए हेलमेट पहनने की महत्ता को उजागर करना चाहती है।
इस नेक काम के लिए आगे आएं हैं वहां के इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र और छात्राएं। ये सभी हेलमेट लगाए लोगों को गुलाब का फूल देंगे। वहीं जिन लोगों को बिना हेलमेट के पाया जाएगा उन्हें फूल के बजाए अपने हाथ पर लड़कियों से राखी बंधवानी पड़ेगी।
ऐसे ही एक व्यक्ति रवींद्र मोहंती ने कहा कि अब मैं जरूर हेलमेट पहनूंगा। दरअसल रवींद्र को शहर के राजमहल स्क्वॉयर पर बिना हेलमेट के स्कूटर चलाते हुए पकड़ा गया था और उसके बाद एक लड़की से उनके हाथ पर राखी बंधवाई गई थी।
रवींद्र कहते हैं कि अगर अगली बार भी मैं उसी लड़की के सामने पकड़ा गया तो मुझे काफी बुरा लगेगा इसलिए मैंने हेलमेट पहनना शुरू कर दिया है।
20 साल के अभिमन्यु मोहपात्रा कहते हैं कि लड़की द्वारा गुलाब का फूल मिलने की बात से मैं पहले काफी डर गया था लेकिन बाद में काफी अच्छा लगा। एक खूबसूरत लड़की ने मुझे एक गुलाब का फूल दिया क्योंकि मैंने हेलमेट पहना था।
इस ट्रैफिक नियम का पालन महिलाओं के लिए भी लागू किया गया है। इनके साथ पुरुष इन्हें फूल देंगे या फिर राखी बांधेंगे।
रुक्मिनी साहू बताती हैं कि मुझे उस वक्त बहुत शर्म आई जब एक लड़के ने मेरी कलाई पर राखी बांधी। आगे से ऐसे शर्मनाक हालात से बचने के लिए मैं हमेशा हेलमेट पहनूंगी।
मालूम हो कि उड़ीसा में सड़क हादसों की दर सबसे अधिक है। अधिकारियों के मुताबिक हर रोज राज्य में सड़क हादसों में कम से कम 10 लोगों की मौत होती है।
पुलिस का कहना है कि कई बार फाइन लगने के बावजूद लोग हेलमेट नहीं पहनते इस वजह से उन्हें इस नायाब तरीके के बारे में सोचना पड़ा।
भुवनेश्वर-कटक पुलिस कमिश्नर बी के शर्मा का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस हर रोज दो सौ से तीन सौ लोगों ने 100 रुपए फाइन वसूलती है लेकिन फिर भी लोग हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करते। कुछ तो फैशन के चक्कर में और कुछ आदत न होने के कारण ऐसा करते हैं।
पहले दिन यानी गुरुवार को ही लड़कियों ने करीब 4 हजार गुलाब के फूल दिए और 2 हजार के करीब राखियां भी बांधी।

Friday

छठ पर रात 10 बजे तक बजेंगे लाउडस्पीकर

सुप्रीम कोर्टने मुंबईमें छठ पर्व के दौरान रात 10 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है। बिहारी संघ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मुंबई के जुहू तट पर रात 10 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 19 अक्टूबर को मुंबई हाईकोर्ट ने छठ पर्व पर लाउडस्पीकरों के प्रयोग पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ बिहारी संघ ने पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, उस दौरान इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्टमें इस संदर्भ में एक ताजा याचिका दायर की गई थी।

Tuesday

अब इम्फाल में धमाका, 14 मरे

तमामा उपायों और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भी देश में बम धमाके रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की सारी तैयारियां धरी की धरी रह जा रही हैं और आतंकी अपने मंशुबों में आसानी से कामयाब होते जा रहे हैं। कब, कहां धमाका हो जाए, यह आतंकियों को छोडक़र किसी को भी पता नहीं है। मंगलवार को आतंकियों की नापाक इरादों की शिकार मणिपुर की राजधानी इम्फाल हुई।
बम विस्फोट में 14 लोगों की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए। विस्फोट रात करीब 8।00 बजे हुआ। पुलिस के अनुसार धमाक शहर के बेहद सुरक्षा वाले इलाके में हुआ तथा विस्फोट बेहद शक्तिशाली था। विस्फोट पुलिस कमाण्डो प्रशिक्षण के प्रशिक्षुओं के लिए बने घरों के पास हुआ, हालांकि मरने वालों में सभी आम नागरिक हैं। 11 लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई, जबकि तीन अन्य ने अस्पताल में दम तोड़ा। घयलों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस विस्फोटक की जांच कर रही है। अभी तक किसी संगठन ने विस्फोट की जिम्मेदारी नहीं ली है। विस्फोट के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि यह पूर्वोत्तर राज्यों में पिछले तीन महीनों में दूसरा बड़ा विस्फोट है। इसके पहले आतंकियों ने अगरतला को निशाना बनाया था। माना जा रहा है कि मंगलवार इम्फाल में हुए धमाके का उद्देश्य सुरक्षा बलों को निशाना बनाना था।

Monday

अज्ञात रावण

चित्रा मुद्गल
पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन, सामाजिक कार्यो में सहभागिता और अस्वस्थता के चलते नियमित रूप से साहित्यिक रचनाओं को पढ़ने का समय तो नहीं निकाल पाती हूं, फिर भी यथासंभव प्रयास करती हूं कि निश्चय 'शिड्यूल' बनाकर ही किसी रचना को पढ़ा जाए। पिछले दिनों भोपाल यात्रा के दौरान कुंवर नारायण की काव्य कृति 'वाजश्रवा के बहाने' पढ़ने का मौका मिला। उनकी यह विलक्षण रचना है। मैं इसे समकालीन हिंदी काव्य की उपलब्धि मानती हूं। इसमें नचिकेता की वापसी के बहाने, परिस्थितिजन्य विषमताओं और आंतरिक द्वंद्वों को नई संवेदनाओं के माध्यम से देखने की कोशिश की गई है। मुझे लगता है कि कुंवर जी के कविता लेखन की पराकाष्ठा है।
हाल में ही दिवंगत हुए पटकथा लेखक और कवि शब्द कुमार द्वारा रचित काव्य नाटक, 'अज्ञात रावण' अपनी तरह की विशिष्ट रचना है। इसमें रावण के उस व्यक्तित्व को नए ढंग से हमारे सम्मुख प्रस्तुत किया गया है जिसे सामान्यत: स्वीकार नहीं किया जाता है। मैं इसे 'अंधा युग' के समतुल्य कृति मानती हूं। हिंदी भाषा में लिखने वाले किसी भी मुस्लिम लेखक का अपने समय के साथ एक बहुआयामी जुड़ाव बहुत कम देखने को मिलता है, इस कमी को काफी हद तक दूर करते हुए मुशर्रफ आलम जौकी ने 'शाही गुलदान' कहानी लिखी है। इसमें गुजरात दंगों के माध्यम से वहां रहने वाले आम मुस्लिमों की दशा को एक मनुष्य के रूप में महसूस किया गया है। इसे पढ़कर मंटो की कहानी 'टोबा टेक सिंह' की याद आ गई। इसी तरह एक साध्वी के माध्यम से जैन समाज में व्याप्त धार्मिक कठमुल्लेपन का बेधड़क खुलासा करते हुए मधु कांकरिया ने 'सेज पर संस्कृत' उपन्यास लिखा है। मधु ने पूरी हिम्मत के साथ धार्मिक आडंबरों के व्यूह में फंसी स्त्री मन की व्यथा को उजागर करने की कोशिश की है।
जहां तक लेखन का सवाल है तो इन दिनों अपने एक उपन्यास 'एक काली एक सफेद' को अंतिम रूप दे रही हूं। यह शीघ्र ही पाठकों के समक्ष आ जाएगा। इसके अलावा डायरी लेखन के बहाने अपने पुराने अनुभवों और संस्मरणों को भी संकलित कर रही हूं। बच्चों के लिए भी कुछ कहानियां लिखी है जो प्रकाशनाधीन है।

Sunday

राहुल ने मेरे सपने चकनाचूर कर दिए

राहुल महाजन से तलाक के बाद उनकी पूर्व पत्नी श्वेता ने अपने विवादास्पद वैवाहिक जीवन पर पहली बार चुप्पी तोड़ी। उन्होंने रविवार को कहा कि राहुल ने उनके सुखी वैवाहिक जीवन के सपनों को चकनाचूर कर दिया।
टीवी चैनल आईबीएन-7 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'हर लड़की चाहती है कि वह अपने पसंद के लड़के के साथ शादी करे और उसके साथ सुखी जीवन बिताए। लेकिन, हमारी शादी के संबंध में ऐसा नहीं हो सका। मेरे सभी सपने टूट गए।'
गौरतलब है कि बीजेपी के स्वर्गीय नेता प्रमोद महाजन के बेटे राहुल और श्वेता की तब से जान पहचान थी जब वे अमेरिका में फ्लाइंग कोर्स की ट्रेनिंग ले रहे थे। श्वेता और राहुल की शादी काफी चर्चा में रही। शादी से कुछ समय पहले राहुल को ड्रग्स के ओवरडोज लेने के कारण अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ा। ऐसे वक्त पर राहुल से शादी करने के निर्णय के बारे में श्वेता ने कहा, 'उस समय वे अकेले थे और कोई भी उनके साथ नहीं खड़ा था। इसलिए मैंने अच्छी दोस्त होने के नाते उनका साथ देने का फैसला किया।'

Saturday

पांच जवान बच्चे, फिर भी जिंदगी लावारिस

  • आशुतोष झा
जब मां-बाप बच्चों का पालन पोषण करते हैं तो उनके मन में यही बात रहती है कि बड़े होकर यही बच्चे उनका नाम रोशन करेंगे और बुढ़ापे का सहारा बनेंगे। लेकिन आज नई पीढ़ी में मां-बाप के प्रति संवेदना समाप्त होती जा रही है। कभी-कभी तो वे बुजुर्ग माता-पिता से पल्ला झाड़ने के लिए उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर देते हैं। ऐसी ही कहानी है 76 वर्षीय हंसराज मलिक की।
दक्षिणी दिल्ली के आश्रम इलाके के हरीनगर निवासी हंसराज मलिक की पत्नी सालों पहले चल बसीं। उन्हें भरोसा था कि पांच बच्चे हैं, उनके सहारे बुढ़ापा आराम से कट जाएगा। मगर, तीन जवान बेटों व दो बेटियों के रहते वे चार दिनों से गली के फुटपाथ पर पड़े हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। गली में पड़े अपनों का इंतजार कर रहे हंसराज मलिक की यह दशा देखकर कोई सोच भी नहीं सकता कि वे कभी शहर के ठीकठाक कपड़ा व्यापारी हुआ करते थे।
कम उम्र में पत्नी की मौत के बाद भी उन्होंने अपने तीनों बेटों आलोक, अजय, संजय व बेटी नीना व सोनिया के परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी। आलोक व अजय आज फाइनेंस के धंधे में हैं। आलोक फरीदाबाद में अपने परिवार के साथ तो अजय रोहिणी में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। तीसरा बेटा संजय बनारस में नौकरी कर रहा है। वह वहीं बस गया है। दो बेटियों में बड़ी नीना भी शादी के बाद गाजियाबाद में अपने पति के साथ रह रही है। हंसराज मलिक कुछ दिनों से अपनी सबसे छोटी बेटी सोनिया के साथ हरीनगर में रह रहे थे। चार दिन पहले पिता से पिंड छुड़ाने के लिए सोनिया भी अपने फ्लैट में ताला लगाकर कहीं चली गई और हंसराज मलिक पांच जवान बच्चों के रहते फुटपाथ पर आ गए। चार दिनों से हरीनगर की गली में फटे पुराने कपड़ों के बीच रह रहे मलिक अपने बच्चों को दोष देने के बजाय कहते हैं कि शायद उनकी परवरिश में ही कोई कमी रह गई थी। वे अपनी किस्मत को भी कोस रहे हैं। आस-पड़ोस के लोग हंसराज की हालत पर तरस खाते हुए उन्हें कुछ न कुछ खाने को दे देते हैं।
कुछ लोगों ने उनके बेटों से टेलीफोन पर संपर्क किया तो पहले नाम पता पूछा। जैसे ही उन्हें बताया गया कि उनके पिता सड़क पर लावारिस हालत में पड़े हैं तो रांग नंबर कहकर फोन काट दिया। पड़ोसी ओम प्रकाश सिंघल ने बताया कि हंसराज मलिक 13 अक्टूबर से गलियों में पड़े हैं। वह बीमारी के चलते चलने-फिरने में भी सक्षम नहीं हैं। बृहस्पतिवार सुबह मोहल्ले के लोगों ने सौ नंबर पर फोन कर पुलिस को बुजुर्ग की हालत के बारे में बताया तो कुछ देर बाद दो पुलिस वाले आए। लेकिन उन्हें भी बुजुर्ग की हालत पर तरस नहीं आया। वह थोड़ी देर में आने की बात कह चलते बने। किसी ने टेलीफोन से जब इसकी सूचना सीनियर सिटीजन सेल को दी तो वहां से भी निराशा हाथ लगी।
इस संबंध में जब 'जागरण' ने सीनियर सिटीजन सेल से बात की तो कहा गया, जब बुजुर्गो की सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1291 पर सूचना मिलती है तो उसका काम बस इतना है कि सूचना पुलिस को दे दे। जिससे पुलिस को आगे की कार्रवाई करने में आसानी हो।

प्यार एक बीमारी है, इलाज है सेक्स

सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यही सच है। डॉक्टरों ने मान लिया है कि प्यार एक बीमारी है और इसका इलाज सेक्स है। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल की डॉ। लेसेल डॉसन ने एक रिसर्च के आधार पर यह नतीजा निकाला है। उनका कहना है कि प्यार नामक यह बीमारी तब ज़्यादा महसूस होती है जब लोगों को अपना प्यार ज़ाहिर करने का मौका नहीं मिलता। इसकी वजह से गुस्सा, फ्रस्ट्रेशन और यहां तक कि मानसिक रोग भी हो सकते हैं। डॉ. डॉसन के मुताबिक एक अमीर आदमी को एक नौकर से प्यार हो गया, लेकिन उन्हें यह प्यार ज़ाहिर करने की इजाज़त नहीं थी, तो लव सिकनेस साफ नज़र आई। डॉ. डॉसन के नतीजे एक किताब में छपे हैं, जिसका नाम है - लव सिकनेस ऐंड जेंडर इन अर्ली मॉडर्न इंग्लिश लिटरेचर। डॉ. डॉसन ने कहा कि सेक्स के ज़रिए प्यार करने वालों के शरीर से नुकसानदायक तत्व बाहर निकल जाते हैं। यही नुकसानदायक तत्व बीमारियों की वजह बनते हैं। नवभारतटाइम्स.कॉम

Friday

अरविंद अडिगा पर है देश को नाज

बुकर पुरस्कार विजेता अरविंद अडिगा की उपलब्धि पर पूर देश को गर्व है। अडिगा कहते है कि अपने उपन्यास व्हाइट टाइगर के जरिए मैं देश की गरीब जनता के दुख-तकलीफ और भावनाओं को चित्रित करना चाहता था। जिस भारत को मैं जानता हूं, जिस भारत में मैं रहता हूं, उस भारत को मैंने अपने उपन्यास में पेश किया है। वह इस बात से इंकार करते है कि अपने उपन्यास में उन्होंने भारतीय समाज की आलोचना की है। अडिगा कहते है कि मैं गरीबी और अन्य सामाजिक विषमताओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहता था, लेकिन पाठकों को बांधे रखना भी मेरा उद्देश्य था। मुझे ऐसी पुस्तकें पसंद है, जो पाठकों की चेतना को प्रभावित कर सकें।
अडिगा के अनुसार जल्द ही पाठकों को उनका अगला उपन्यास पढ़ने का मौका मिलेगा। उनका अगला उपन्यास प्रकाशन के लिए बिल्कुल तैयार है। वह यह कहने में संकोच नहीं करते कि मैं उन लोगों के बारे में लिखना चाहता हूं, जिनके बारे में कभी लिखा नहीं गया।
[यूं लिखा पहला उपन्यास]
अडिगा बताते है कि द व्हाइट टाइगर उपन्यास मैंने टुकड़ों में लिखा था। वर्ष 2005 में मैंने उपन्यास का पहला भाग लिखा और उसे अलग रख दिया। दरअसल मैं स्वयं को ही नहीं समझ पा रहा था। विदेश में लंबा समय बिताने के बाद दिसंबर 2006 में जब मैं भारत लौटा, तो मैंने उपन्यास का प्रथम भाग खोला और उसे दोबारा नए सिरे से लिखना आरंभ किया। इस बार मैंने उपन्यास पूरा करके ही विश्राम लिया। जनवरी 2007 में मेरा उपन्यास पूर्ण हुआ।
[लेखन पर प्रभाव]
अडिगा कहते है कि मुझे लगता है कि मेरे प्रथम उपन्यास लेखन पर तीन अश्वेत अमेरिकी लेखकों राल्फ एलीसन, जेम्स बाल्डविन एवं रिचर्ड राइट का प्रभाव पड़ा है। हालंकि मैंने सालों से उनके कोई उपन्यास नहीं पढ़े। करीब दस साल पहले मैंने एलीसन का उपन्यास इनविजीबिल मैन पढ़ा था। यह उपन्यास मैंने दोबारा कभी नहीं पढ़ा, पर मुझे लगता है कि अप्रत्यक्ष रूप से उनका प्रभाव मेर लेखन पर पड़ा है। वैसे मैं किसी पहचान से बंधा नहीं हूं।
जागरण

Thursday

जेट से निकाले गए कर्मचारी बहाल होंगे

एक बेहद नाटकीय डेवलपमंट के तहत जेट एयरवेज ने अपने सभी निकाले गए कर्मचारियों को
दोबारा काम पर बुलाने का फैसला किया है। जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने गुरुवार देर रात एक प्रेस कॉन्फरन्स में इस बात का ऐलान करते हुए कहा कि जेट के सभी कर्मचारी मेरे परिवार का हिस्सा हैं। बेहद भावुक हो चुके गोयल ने कहा कि मैं अपने लोगों का दर्द समझता हूं। मैं भी जवानी में इस दौर से गुजर चुका हूं। नरेश गोयल ने कहा कि मैंने यह फैसला किसी दबाव में नहीं लिया है। गोयल ने कहा कि इस छटनी और फिर बहाली का किंगफिशर के साथ गठजोड़ से कोई ताल्लुक नहीं है। नरेश गोयल ने कहा कि मुझे किसी सियासी पार्टी या नेता का डर नहीं है, मुझे सिर्फ भगवान और परिवार की फिक्र है। उन्होंने कहा कि मैं दो दिनों से कहीं बाहर था, लेकिन जब मैं वापस आया तो मुझे सारी बात पता चली, जिससे मुझे काफी दुख हुआ। उन्होंने कहा कि मुझे मैनिजमंट ने इस फैसले के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि मैं अंकगणित, नफा-नुकसान और अर्थशास्त्र के बारे में ज़्यादा नहीं जानता। उन्होंने कहा कि मैं इमोशनल आदमी हूं। मैं अपने परिवार में किसी को भी रोते हुए नहीं देख सकता। सभी कर्मी मेरे बच्चे की तरह हैं। मेरी बेटी 19 साल की है। वह सभी 19-21 साल के हैं। हम सभी उड़ना चाहते हैं। कोई भी ज़मीन पर नहीं आना चाहता है।
नवभारतटाइम्स

पागल बना देती है पायल

कभी पागल बना देती है पायल
कभी घायल कर देती है पायल
जो झनकती है कानों में
दिल में उतर जाती है
मेरी हसरत को
दिवाना बना देती है पायल
न सुनू खन से खनकना
तो सुकून नहीं मिलती
मेरी नजरों में हर पल
रुसवाई बन जाती है पायल
कभी पागल
कभी घायल
बना देती है पायल

मंतोष कुमार सिंह

न्यायमूर्ति हाजिर हो.....

  • महेश परिमल
न्याय और अन्याय के बीच अधिक अंतर नहीं होता। जिसे न्याय मिलता है, उसका प्रतिद्वंद्वी यही मानता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है। न्यायाधीश का निर्णय कभी निष्पक्ष नहीं हो सकता। जिसे न्याय मिला, वह भी तो एक पक्ष है, फिर यह निर्णय निष्पक्ष कैसे हुआ? जितना अंतर न्याय और अन्याय के बीच है, उतना ही अंतर कामयाब और नाकामयाब के बीच है। अन्याय को लेकर हमेशा बड़ों पर ऊँगली उठती है। पर अब हमारे देश में न्याय को लेकर भी ऊँगलियाँ उठने लगी हैं। अब पंच परमेश्वर वाली बात केवल कहानियों तक ही सिमट गई है। हाल ही में देश के कुछ न्यायाधीशों की गलत हरकतों से यह साफ हो गया कि अब वे अन्याय को न्याय में बदलने के लिए अपने को बदलने के लिए तैयार हैं।
आज देश के समग्र न्यायतंत्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप की काली छाया मँडराने लगी है। सामान्य मनुष्य का अपराध एक बार माफ किया जा सकता है, किंतु सरकार ने जिन्हें न्यायाधीश की कुर्सी पर बिठाया है, वे यदि अपराध करते हैं, तो उन्हें किस तरह से माफ किया जाए? इन दिनों देश की अदालतों में न्यायमूर्तियों पर भ्रष्टाचार का एक नहीं, बल्कि तीन गंभीर मामलों की जमकर चर्चा है। इन तीन मामलों के कारण देश की न्यायतंत्र की प्रतिष्ठा दाँव पर लग गई है।
पहला मामला कोलकाता हाईकोर्ट के जज सौमित्र सेन द्वारा 32 लाख रुपए हड़प लेने का है। इस मामले में जज ने अपना इस्तीफा नहीं देने का निर्णय लिया है। किंतु उन्हें बर्खास्त करने के लिए सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस ने केंद्र सरकार को संसद में इंपिचमेंट का मोशन लाने का अनुरोध किया है। दूसरा मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज निर्मल यादव का है, जिन पर 15 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप के तहत पूछताछ करने की अनुमति सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस ने दे दी है। तीसरा मामला तो और भी गंभीर है, जो गाजियाबाद का है। यहाँ की अदालत में चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के प्रोविडंट फंड के खातों में से निकाले गए 23 करोड़ रुपए फर्जी वाउचरों के माध्यम से निकाले गए। इस धनराशि का उपयोग तत्कालीन 36 यूडिशियल ऑफिसरों के लिए विविध ऐश्वर्यशाली वस्तुएँ खरीदने में किया गया। इस मामले में सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के 11 जजों को लिखित रूप से आरोपों का जवाब देने के लिए कहा है। यह काम उत्तरप्रदेश पुलिस को सौंपा गया है।
गाजियाबाद की कोर्ट की तिजोरी से जिस तरह से 23 करोड़ रुपए निकाले गए और उसका उपयोग जजों के लिए घरों के सामान खरीदने के लिए किया गया, उसके कारण देवतास्वरूप न्यायमूर्तियों के आचरण को लेकर कुछ सोचने के लिए विवश कर दिया। गाजियाबाद की एडीशनल सेशन्स जज श्रीमती रमा जैन को खयाल आया कि इस वर्ष फरवरी माह में अदालत की तिजोरी से फर्जी वाउचरों के माध्यम से 23 करोड़ रुपए निकाले गए हैं। उन्होंने तुरंत ही इसकी सूचना गाजियाबाद पुलिस को दी और एफआईआर दर्ज कराया। इसके बाद गाजियाबाद के एसएसपीए ने इस मामले की जाँच शुरू की।
पुलिस जाँच में यह सामने आया कि इस मामले के मुख्य सूत्रधार राजीव अस्थाना हैं। जिसने विभिन्न डिस्ट्रिक्ट जजों की सूचना से 2001 और 2007 के बीच अदालत की तिजोरी में से 23 करोड़ रुपए हड़प लिए थे। पुलिस के सामने अपने बयान में उसने इस बात को स्वीकार किया था कि इन रुपयों का उपयोग उसने अनेक जजों के लिए उनकी घर-गृहस्थी के सामान को खरीदने में किया था, जिसमें सुप्रीमकोर्ट के एक जज और इलाहाबाद हाईकोर्ट के 11 जज भी शामिल थे। अस्थाना ने यह भी दावा किया था कि गाजियाबाद के भूतपूर्व डिस्ट्रिक्ट जज आर।एस. चौबे के कहने पर उसने सुप्रीमकोर्ट के एक वर्तमान न्यायमूर्ति के घर भी टॉवेल, बेड-शीट, क्रॉकरी आदि चीजें पहुँचाई थीं। बाद में अस्थाना ने गाजियाबाद के एडिशनल चीफ युडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने भी इस प्रकार का बयान दिया था। गाजियाबाद की कोर्ट में काम करने वाले तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के वेतन में से जो राशि प्रोविडन्ट फंड और ग्रेयुटी के रूप में काट ली जाती है, उसे अदालत की तिजोरी में जमा कर लिया जाता है। अस्थाना के अनुसार उसने इन खातों में से गलत बाउचर बनाकर 23 करोड़ रुपए हड़प लिए थे। इन रुपयों में से कोलकाता हाईकोर्ट के एक वर्तमान जज के घर उसने टी.वी., फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे उपकरण भी खरीद कर पहुँचाए थे। अस्थाना ने ऐसा दावा किया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के कम से कम सात सिटींग जजों को भी इन रुपयों में से लाभ मिला है। इनके लिए भी कम्प्यूटर, मोबाइल फोन, फर्नीचर आदि वस्तुएँ खरीदी गई थीं। गाजियाबाद के एसएसपी ने इन जजों से पूछताछ करने की अनुमति सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस से माँगी हैं। उन्हें इस संबंध में मात्र लिखित प्रश्न पूछने की ही छूट दी गई है। गाजियाबाद के एसएसपी दीपक रतन का कहना है कि इस संबंध में उन्हें 36 न्यायमूर्तियों को पूछने के लिए प्रश्नों की सूची तैयार कर राय सरकार को भेजी है। इन सवालों की एक बार सुप्रीमकोर्ट भी जाँच करेगी, उसके बाद ही सवालों को संबंधित न्यायाधीशों को भेजा जाएगा। इस मामले में अब तक राजीव अस्थाना समेत 83 लोगों के खिलाफ फौजदारी मामला फाइल किया गया। इनमें से 64 की धारपकड़ की गई है। अस्थाना ने यह स्वीकार किया है कि इस मामले में 36 न्यायमूर्ति भी शामिल हैं। इस मामले को एक तरफ राय सरकार रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है, दूसरी तरफ भारत के पूर्व कानून मंत्री शांतिभूषण ने सुप्रीमकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इस मामले की निष्पक्षता से जाँच की माँग की है। इनका साथ गाजियाबाद बार एसोसिएशन और ट्रांसपरंसी इंटरनेशनल नाम की संस्थाओं ने भी किया है। इसके पूर्व सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस के.जी. बालकृष्णन की इच्छा इन याचिकाओं की सुनवाई बंद दरवाजे में करने की थी, पर शांतिभूषण ने यह आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को दबाना चाहती है, इसलिए ऐसा किया जा रहा है। इसके मद्देनजर अब इस मामले की सुनवाई खुली कोर्ट में की जा रही है। हमारे देश में हाईकोर्ट या फिर सुप्रीमकोर्ट के कोई भी सिटिंग जज भ्रष्टाचार करे, तो उनके खिलाफ जाँच करने का कोई कानून ही नहीं है। अभी इस मामले की जाँच सुप्रीमकोर्ट जज द्वारा चयन की गई तीन जजों की समिति कर रही है, पर इनकी कार्रवाई अत्यंत गुप्त रखी जा रही है। इस मामले में सरकार की नीयत भी ठीक दिखाई नहीं दे रही है, क्योंकि जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच के लिए संसद में दिसम्बर 2006 में जजीस इंक्वायरी बिल पेश किया गया था, पर सरकार न्यायपालिका के साथ किसी प्रकार का पंगा नहीं लेना चाहती, इसलिए इस प्रस्ताव को ताक पर रख दिया गया। बहरहाल इस मामले का जो भी फैसला आए, पर सच तो यह है कि इस मामले ने जजों को भी संदेह के दायरे में खड़ा कर दिया है। देश के न्यायमूर्तियों को स्वच्छ होना ही नहीं, बल्कि स्वच्छ दिखना भी चाहिए। आज न्याय को लेकर कानून अपने हाथ में लेने से भी लोग नहीं चूक रहे हैं। कानून हाथ में लेना आम बात हो गई है। जो दमदार हैं, उन्हें मालूम है कि न्याय को किस तरह से अपने पक्ष में किया जा सकता है। इस मामले में यदि आरोपी न्यायाधीशों पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो निश्चित ही लोगों न्याय पर से विश्वास उठ जाएगा और यह स्थिति बहुत ही भयावह होगी, यह तय है।
हम समवेत

Tuesday

अब कानपुर में धमाका

कानपुर में कर्नलगंज क्षेत्र के बजरिया थाना इलाके में आज हुए एक धमाके में पांच लोग के घायल हो गए है। घायलों में दो की हालत नाजुक बताई गई है। धमाका शाम को लगभग 6.30 बजे एक दुकान के बाहर लावारिस पडी साइकिल में हुआ। पुलिस में बताया कि साइकिल पर एक बैग रखा था, जिसमें संभवत: विस्फोटक था। आज शाम अचानक ही विस्फोट हुआ और चारों ओर धुंआ फैल गया। विस्फोट के बाद साइकिल के परखच्चे उड गए। धमाके में पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों को पास ही के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों ने बताया कि घायलों में तीन बच्चे और दो महिलाएं शामिल हैं। घायलों में दो की हालात गभीर बताई गई है। पुलिस ने बताया है कि यह आतंककारी हमला नहीं है। एडीजी कानपुर ने कहा कि धमाका देसी बम से हुआ है। कर्नलगंज इलाका कानपुर में भारी आबादी वाला क्षेत्र है। विस्फोट के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल फै ल गया। चारों तरफ भागदौड मच गई। धमाके के बाद पुलिस ने एहितायत के तौर पर पूरा इलाका सील कर दिया है। पुलिस सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करने में जुटी हुई है। फिलहाल इलाके की परिवहन व्यवस्था को वैकल्पिक मार्गों से चलाया जा रहा है।

ज्यादा पीने से सिकुड़ जाता है दिमाग

शराब को गले लगाने वालों के लिए एक नया शोध चिंता पैदा करने वाला है जिसके मुताबिक ज्यादा पीने से दिमाग सिकुड़ जाता है।
अमेरिका में मेसाच्युसेट्स स्थित वेलेसले कॉलेज के वैज्ञानिक केरोल आन पेन की अगुआई में किए गए शोध में यह बात सामने आई है। शोध में पता चला है कि सीमित मात्रा में काफी लंबे समय तक शराब पीने से भी दिमाग सिकुड़ जाता है जबकि काफी अधिक मात्रा में शराब पीने वालों का दिमाग कम समय में ही सिकुड़ जाता है।
इतना ही नहीं महिलाओं में यह खतरा पुरुषों की तुलना में कुछ ज्यादा ही होता है। इसलिये महिलाओं के लिये शराब पीना ज्यादा जोखिम भरा शौक हो सकता है। डॉ. पेन ने बताया कि आमतौर पर महिलाओं का दिमाग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है और एल्कोहल के प्रभाव के मामले में महिलाएं ज्यादा संवेदनशील होती हैं इसलिये इनके लिए यह शौक जोखिमभरा कहा जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक सप्ताह में एक से सात गिलास तक शराब पीना सेफ माना जा सकता है लेकिन लगभग जीवनभर यह आदत पालकर रखना दिल के लिए भले ही फायदेमंद हो दिमाग के लिहाज से यह नुकसानदायक हो सकती है। जबकि शोध के मुताबिक सात से 14 गिलास शराब सप्ताह में पीना जोखिम के दायरे में आता है। यह जोखिम दिल और दिमाग के अलावा यकृत और अन्य अंगों को भी अपने दायरे में ले लेता है।
आईबीएन-7

Monday

झीलों के शहर के प्यासे लोग

  • मंतोष कुमार सिंह

भोपाल यानी झीलों की नगरी। अगर यहां के लोग भी प्यासे रहने लगें तो इसे गंभीर चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए। जी हां भोपालवासी, पानी की एक-एक बूंद के लिए अभी से जद्दोजहद करने लगे हैं। अल्पवर्षा के कारण भोपाल की जीवन रेखा कहे जाने वाली बड़ी झील की प्यास नहीं बुझ पाई है। झील में केवल दो माह का पानी बचा है। जिसके कारण सरकार ने अगले साल मानसून आने तक लोगों की प्यास बुझाने के लिए एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई करने का फैसला किया है।
पानी की समस्या के लिए प्रशासन, प्रकृति और भोपालवासी सभी जिम्मेदार हैं। इस प्रकार की समस्या १९८९ और २००२ में भी आ चुकी है, जब एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई करनी पड़ी थी। इसके बावजूद भी किसी ने सबक नहीं लिया। समस्या के निजाद के लिए कोई भी कारगर कदम नहीं उठाए गए। आज भी भोपाल में ४३ प्रतिशत पानी बेकार चला जाता है, जिसपर नगर निगम लगाम नहीं लगा सका है। अगर मात्र बेकार बह जाने वाले पानी पर ही रोक लग जाए तो ऐसी नौबत नहीं आती, लेकिन कौन जहमत उठाए। नर्मदा नदी जल योजना भी कछुवे की चाल चल रही है। कुल मिलाकर यहां के बाशिंदों से जल ही जीवन है का मतलब पूछा जाए तो वे बेहतर तरीके से बता सकते हैं।

Saturday

रहने दो खुशियों के घर में

अंधेरे में हमने, जीवन गुजारा
उजाले से कैसे, दोस्ती करूंगा
बचपन कटा है, घरौंदों में जिसका
महलों की महफिल, कैसे सजेगी
अंधेरे में -----------------
दिल में न था, गम का किनार
मोहब्बत के दीये, कैसे जलेंगे
अंधेरे में -----------------
उन्हें क्या पता, क्यों हम हैं खफा
मनाते जो हमको, कैसे मनाते
अंधेरे में -----------------
रहने दो हमको, खुशियों के घर में
गांवों की गलियां, कैसे सजेगी
अंधेरे में हमने, जीवन गुजारा
उजाले से कैसे, दोस्ती करूंगा

  • मंतोष कुमार सिंह

Friday

पालना नहीं था तो पैदा क्यों किया मां?

साइबर सिटी गुड़गांव में एक बार फिर एक बच्चे को अस्पताल में छोड़ने की घटना सामने आई है। गुड़गांव के पारस अस्पताल में इसी महीने के 2 अक्टूबर को पैदा हुए इस बच्चे को उसके मां-बाप बेसहारा छोड़कर चले गए। बच्चा अभी भी इसी अस्पताल के ICU में भर्ती है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक इस बच्चे का जन्म समय से तीन महीने पहले ही हो गया है जिसके कारण इसकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है। अस्पताल में इस बच्चे के मां-बाप ने जो पता लिखवाया था वो भी गलत निकला।
पुलिस ने IPC की धारा 337 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और वह मासूम के मां-बाप की तलाश कर रही है। दिल्ली से सटे गुड़गांव में पिछले 15 दिनों में बच्चों के छोड़े जाने की ये दूसरी घटना है। दोनों ही घटनाओं में अब तक बच्चों के मां-बाप का पता नहीं चल पाया है। ऐसे में अस्पताल ही इनके लिए एक सहारा है।
आईबीएन-7

Thursday

रावण की भी होती है पूजा

इंद्रधनुषी संस्कृति के देश भारत में मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में राम तो पूजे ही जाते हैं लेकिन कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहाँ रावण की पूजा की जाती है और धीरे-धीरे बुराई के इस प्रतीक के समर्थकों की संख्या बढ़ रही है।हाल ही में झारखंड के मुख्यमंत्री शिबु सोरेन ने रावण के पुतले का दहन करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि यह राक्षसराज उनके कुलगुरु हैं जिसके बाद राजनीतिक विवाद भी पैदा हो गया। हालाँकि बिहार से अलग होकर झारखंड के गठन के बाद से वर्ष 2000 से ही राज्य के मुख्यमंत्री रावण का पुतला दहन करते रहे हैं।माना जाता है कि राम ने विजया दशमी के दिन ही रावण का वध किया था जो बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देश में त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
देश में सोरेन अकेले व्यक्ति नहीं हैं जो रावण का सम्मान करते हैं। मध्य प्रदेश के दमोह नगर में एक परिवार ऐसा भी है जो आज भी लंका नरेश रावण को अपना ईष्ट मानता है।दमोह के सिन्धी कैम्प में रहने वाला यह सिन्धी परिवार पीढ़ियों से अपने ईष्ट रावण को पूजता आ रहा है। इस परिवार के सदस्य 32 वर्षीय हरीश नागदेव पूरे जिले में लंकेश के नाम से मशहूर है। वह अपने पूरे परिवार के साथ प्रतिदिन अपने ईष्ट दशानन की पूजा विधि विधान से करते हैं। स्वयं मंत्रों का उच्चारण कर दशानन की मूर्ति को स्नान कराके वस्त्र पहनाते हैं एवं आरती के बाद प्रसाद चढ़ाकर सभी को बाँटते हैं। यह कार्य उनकी दिनचर्या में शामिल है। दशहरा पर दामोह का नागदेव परिवार समूचे उल्लास के साथ शहर के घंटाघर पर रावण के स्वरूप की आरती उतारकर मंगल कामना करता है। नागदेव परिवार ने विशाल लंकेश मंदिर बनाने की वृहद योजना तैयार की है और शासन से जमीन की भी माँग की है।उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा सहित उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में दशहरा का त्योहार मनाया जाता है और रावण का पुतला दहन होता है। लेकिन महाराष्ट्र के ही आदिवासी बहुल मेलघाट (अमरावती जिला) और धरोरा (गढ़चिरौली जिला) के कुछ गाँवों में रावण और उसके पुत्र मेघनाद की पूजा होती है।यह परंपरा विशेष तौर पर कोर्कू और गोंड आदिवासियों में प्रचलित है जो रावण को विद्वान व्यक्ति मानते हैं और पीढ़ियों से वे इस परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। हर साल होली के त्योहार के समय यह समुदाय फागुन मनाता है जिसमें कुर्कू आदिवासी रावण पुत्र मेघनाद की पूजा करते हैं।मध्यप्रदेश में विदिशा के हजारों कान्यकुब्ज ब्राह्मण रावण मंदिर में पूजा करते हैं। कई क्षेत्रों में दशहरे पर रावण का श्राद्ध भी किया जाता है। उत्तरप्रदेश में कानपुर के निकट भी एक रावण मंदिर है जो दशहरे के मौके पर साल में एक दिन के लिए खुलता है। कर्नाटक के कोलार जिले में भी लोग फसल महोत्सव के दौरान रावण की पूजा करते हैं और इस मौके पर जुलूस निकाला जाता है। ये लोग रावण की पूजा इसलिए करते हैं क्योंकि वह भगवान शिव का भक्त था। लंकेश्वर महोत्सव में भगवान शिव के साथ रावण की प्रतिमा भी जुलूस की शोभा बढ़ाती है। इसी राज्य के मंडया जिले के मालवल्ली तालुका में रावण को समर्पित एक मंदिर भी है। राजस्थान में जोधपुर से करीब 32 किलोमीटर दूर मंदोर में ही रावण का विवाह होने की कथा है। रावण की एक पत्नी का नाम मंदोदरी था और दावा किया जाता है कि इसी स्थान के नाम पर उसका यह नाम पड़ा। इसी क्षेत्र के दवे ब्राह्मण दशहरा पर रावण पूजा करते हैं। कुछ साल पहले इन लोगों ने जोधपुर में रावण मंदिर की स्थापना की घोषणा भी की थी।कथाओं के अनुसार रावण ने आंध्रप्रदेश के काकिनाड़ में एक शिवलिंग की स्थापना की थी और इसी शिवलिंग के निकट रावण की भी प्रतिमा स्थापित है। यहाँ शिव और रावण दोनों की पूजा मछुआरा समुदाय करता है।रावण को लंका का राजा माना जाता है और श्रीलंका में कहा जाता है कि राजा वलगम्बा ने इला घाटी में रावण के नाम पर गुफा मंदिर का निर्माण कराया था।रावण के बारे में जो कथाएँ प्रचलित हैं उनके अनुसार वह ब्राह्मण ऋषि और राक्षण कुल की कन्या की सन्तान था। उसके पिता विशरवा पुलस्त्य ऋषि के पुत्र थे जबकि माता कैकसी राक्षसराज सुमाली की पुत्री थी। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि रावण का जन्म उत्तरप्रदेश के एक गाँव में हुआ था।उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद में कटरा का रामलीला शुरू होने पर पहले दिन हर साल रावण जुलूस निकाला जाता है और स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह परंपरा पाँच सौ साल पुरानी है। इन लोगों का कहना है कि इसी संगम नगरी में भारद्वाज ऋषि की कुटिया थी और उनकी शिक्षा है कि ब्राह्मणों की पूजा की जानी चाहिए। भारद्वाज ऋषि की इसी शिक्षा को इलाहाबाद में रावण जुलूस का आधार बताया जाता है।

Monday

शर्मा की शहादत का मजाक

राजधानी के जामिया नगर इलाके में बाटला हाउस में पिछले महीने हुए एनकाउंटर में शहीद हुए इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के परिवार वालों ने समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव अमर सिंह की ओर से भेजी गई सहायता राशि को लेने से इनकार कर दिया है। शर्मा की शहादत पर उठाए गए सवालों से आहत परिवार ने अमर सिंह का 10 लाख रूपए के चेक को ठुकरा दिया है। मोहन चंद शर्मा की पत्नी माया शर्मा ने कहा कि यह उनके पति की शहादत का मजाक उडाने जैसी बात है।
एनकाउंटर में शर्मा की मौत के बाद अमर सिंह और जामा मस्जिद के शाही इमाम समेत कई नेताओं ने शर्मा के वहां जाने पर सवाल खडे किए थे। अमर सिंह ने कहा था कि "आखिर शर्मा वहां क्या करने गए थे।" उन्होंने इस मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की भी मांग की थी।अमर सिंह के बयान से आहत माया शर्मा ने चेक को ठुकराते हुए कहा कि बेटे के गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद इंस्पेक्टर शर्मा देश के लिए जान देने चले गए। उन्होंने कहा कि "आखिर कितने लोग ऎसे हैं, जो घर में बूढे मां-बाप और अबोध बच्चों और पत्नी को छोडकर देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर सकते हैं।" उल्लेखनीय है कि राजधानी में गत 13 मई को हुए पांच धमाकों के सिलसिले में आतंकियों को पकडने के दौरान बटाला हाउस में पुलिस और आतंककारियों के बीच हुई मुठभेड में इंस्पेक्टर शर्मा की मौत हो गई थी। इस एंकाउंटर में दो आतंककारी भी मारे गए थे। मुठभेड को लेकर कई सवाल खडे किए गए थे।