Thursday

डीएनए के धागों से वंश की तलाश

पता चला है कि अमरीका और पश्चिमी यूरोप में गोद लिए गए पुरुष डीएनए जाँच से अपने वंशजों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और वाई क्रोमोसोम की मदद से इसमें सफलता भी पा रहे हैं। ये लोग इस तथ्य का सहारा ले रहे हैं कि एक जैसे उपनाम रखने वाले लोगों के बीच कभी-कभी आनुवांशिक समानताएँ मिल जाती हैं.
डीएनए के 'डाटाबेस' से ये उन पुरुषों की पहचान करते हैं जिनकी आनुवांशिक पहचान उनसे भी मेल खाती हों और तब वो यह देखते हैं कि क्या उनके अंतिम नाम भी एक हैं। इससे उनको यह पता चल सकता है कि उनके वंशजों ने किस तरह के उपनाम रखे होंगे।एक जैसे उपनाम वाले लोगों में जो आनुवांशिक समानताएँ मिलती हैं, वह वाई क्रोमोसोम पर पाया जाता है. वाई क्रोमोसोम पर मिलने वाला यह गुण एक उपनाम की तरह थोड़े-बहुत बदलाव के साथ बाप से बेटे को मिलता जाता है। इस तरह के वंशानुक्रम के कारण एक जैसे उपनाम वाले लोगों के वाई क्रोमोसोम पर मौजूद उनके आनुवांशिक पहचान के निशान भी आपस में मेल खा सकते हैं. आनुवांशिक जाँच करने वाली अमरीकी कंपनी 'ट्री डीएनए' के पास सवा लाख लोगों के उपनाम और उनके आनुवांशिक गुणों का रिकॉर्ड है और इस आंकड़े को कंपनी ने 'वाईसर्च' नाम से इंटरनेट पर डाल रखा है।
बीबीसी

Wednesday

वज़न घटाने में मददगार नाश्ता

सुबह अच्छी तरह डटकर नाश्ता करने से वज़न घटाने में मदद मिल सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सुबह का नाश्ता ही सबसे महत्वपूर्ण आहार है। अधिक वज़न वाली महिलाओं पर कई महीनों तक किए गए शोध में पाया गया कि जो महिलाएँ अपने दिन भर की ख़ुराक का आधा हिस्सा सुबह ही खा लेती हैं उनका वज़न उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ता, जितना कम मात्रा में खाने वाली महिलाओं का। अमरीकी शोधकर्ता डैनियला याकोविच ने सैन फ्रैन्सिसको में एक सम्मेलन में बताया कि हल्का नाश्ता करने से भूख और तीव्र हो सकती है जिससे वज़न बढ़ने की आशंका रहती है। डैनियला का कहना है कि सबसे अधिक कैलोरी सुबह के नाश्ते में, उससे कम दोपहर के खाने में और सबसे कम रात के खाने में ली जानी चाहिए। अगर नाश्ते में 1240 कैलोरी, लंच में 395 और रात के खाने में 235 कैलोरी ली जाए तो वज़न को नियंत्रण में रखा जा सकता है। शोध में पाया गया है कि कम कार्बोहाइड्रेट वाले खाने से लोगों का वज़न कम तो होता है लेकिन उनका वज़न कुछ समय बाद दोबारा बढ़ जाता है जबकि अधिक मात्रा में संतुलित भोजन सुबह ही करना अधिक कारगर रहता है, इस तरीक़े से घटाया गया वज़न दोबारा नहीं बढ़ता है डैनियला कहती हैं, "कार्बोहाइड्रेट में कटौती करके वज़न घटाने से भूख अधिक लगती है, पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, वज़न जल्दी से कम हो जाता है लेकिन दोबारा बढ़ भी जाता है।"एबरडीन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एलेक्स जॉनसन कहते हैं, "कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार से वज़न कम तो हो जाता है लेकिन जीवन भर इसे निभाना बहुत मुश्किल है जबकि दुसरे तरीक़ों को निभाया जा सकता है।" डैनियला का कहना है कि सुबह का नाश्ता अच्छी तरह न करने वाले लोगों को भूख लगती है और लंच के समय से पहले ही तरह-तरह के बिस्कट, केक जैसी चीज़ें खाने लगता है जिससे वज़न बढ़ता है।

Sunday

‘गृहलक्ष्मी’ यूं बनाए पैसा

  • मनीषा बेलगांवकर
मिसेस शर्मा को पिछले कई सालों से उनके पति हर माह एक हजार रुपए देते आ रहे हैं, जिसे वे सहेजती जा रही हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं कि वह इस रकम को कई गुना कर सकती है। वह आमतौर पर घरेलू इस्तेमाल की वस्तुएं खरीद लेती हैं। वह इस बार 20,000 रुपए जोड़ चुकी हैं और अब रकम को कई गुना करना चाहती हैं।
जाहिर-सी बात है इतनी बड़ी रकम घर में रखना खतरनाक है। अगर वह रकम ऐसे ही रखती हैं तो 8 फीसदी मुद्रास्फीति के कारण उनके 20 हजार रुपए का मूल्य अगले साल 18,400 रुपए रह जाएगा। ऐसे में पता करते हैं कि मिसेस शर्मा को क्या करना चाहिए:
1. मिसेस शर्मा के सामने विकल्प हैं-
पोस्ट आफिस बचत, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) और फिक्स्ड डिपाजिट (एफडी)। इनमें 8 से लेकर 9.5 फीसदी तक का ब्याज मिलता है। मौजूदा मुद्रास्फीति की दर के मद्देनजर ये तीनों निवेश के इतने कारगर माध्यम नहीं हैं, लेकिन इनसे मुद्रास्फीति के प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है।
2. मिसेस शर्मा थोड़ा रिस्क उठाने को तैयार हैं तो उन्हें अधिक रिटर्न भी मिल सकता है। इसके लिए उनके पास मौजूद हैं म्यूचुअल फंड की कई स्कीमें। इनमें डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) और बैलेंस्ड फंड शामिल हैं, जिनमें उन्हें 20 से 30 फीसदी तक का रिटर्न आसानी से मिल सकता है। म्यूचुअल फड स्कीमों में निवेश से पहले उन्हें पैन कार्ड बनवाना पड़ेगा जो यूटीआई के जरिये बनवाया जा सकता है।
( लेखिका भोपाल स्थित ‘फिन आप्शंस’ से संबद्ध बिजनेस एनालिस्ट हैं। )

Saturday

लालू का ब्लॉग शिकायतों से भरा

केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का ब्लॉग निश्चित तौर पर सभी का ध्यान आकर्षित करने वाला है लेकिन उनका यह ब्लॉग रेलवे का शिकायत बॉक्स ज्यादा लगता है। लालू यादव ने अपने ब्लॉग ‘डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट माईपोपकोर्न डॉट कॉम’ पर पिछले नौ जून को महंगाई पर अपनी टिप्पणी पोस्ट की थी। उनके इस पोस्ट के जवाब में 68 लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया भेजी है। लेकिन इन प्रतिक्रियाओं में महंगाई की चर्चा कम और रेलवे से जुड़ी शिकायतें ज्यादा हैं। लालू का ब्लॉग लोगों के लिए रेलवे से जुड़ी अपनी शिकयतें पहुंचाने का प्लेटफार्म बन गया है। कोई ट्रेनों में मिलने वाले भोजन, वहां की साफ सफाई और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें करता है तो कोई अपने क्षेत्र में नई ट्रेन चलाए जाने की मांग करता है। लालू ने अपने नए ब्लॉग में रेल मंत्री ने महंगाई को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की सबसे बड़ी चिंता बताया है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यजनक लेकिन अनिवार्य बताया है। रेलवे को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने वाले लालू अपने ब्लॉग में कहते हैं कि बढ़ती महंगाई के बावजूद वह आम आदमी के लिए रेलवे को सुलभ बनाए रखेंगे। वे कहते हैं कि रेलवे की संचालन लागत में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन इसके बावजूद हमने रेलवे का किराया नहीं बढ़ाया, बल्कि इसे घटाया है। अपने ब्लॉग के माध्यम से उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कुछ सुझाव भी दिए हैं। शशांक त्रिवेदी जैसे कुछ लोग महंगाई बढ़ाए जाने की लालू की दलील से सहमत दिखाई पड़ते है तो कुमार कर्तव्यवीर जीत शरव नई दिल्ली और बिहार-झारखंड के बीच ट्रेन सेवा बढ़ाए जाने की बात करते हैं। इसी प्रकार ए. के. साहू उड़ीसा के लिए नई ट्रेन चाहते हैं। अविनाश कुमार दूबे की शिकायत ट्रेनों की आवाजाही में होने वाले विलंब को लेकर है।

Friday

याहू और गूगल में समझौता

अब तक एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे याहू और गूगल के बीच एक समझौता हुआ है। इसके तहत याहू गूगल की ऑनलाइन विज्ञापन तकनीक का सहारा ले सकेगा. दूसरी ओर याहू सर्च इंजन के परिणामों के साथ गूगल के विज्ञापन दिखाई देंगे। हालाँकि ये समझौता केवल अमरीका और कनाडा के लिए होगा. याहू के अधिग्रहण की माइक्रोसॉफ़्ट की कोशिशें विफल होने के बाद इस समझौते को अहम माना जा रहा है। माइक्रोसॉफ़्ट ने अपने गिरते विज्ञापन व्यवसाय के चलते याहू पर नज़रें गड़ाईं थीं। महीनों मोल-भाव करने के बाद भी दोनों के बीच सौदा नहीं पट सका था. याहू का कहना है की ये समझौता उसके लिए 32 अरब रूपए से अधिक का अतिरिक्त राजस्व ला सकता है। गूगल के चेयरमैन एरिक श्मिटज़ का कहना है, "यह समझौता याहू को अवसर प्रदान करता है की वो अपना सर्च इंजन इस्तेमाल करने वालों को अधिक उपयोगी विज्ञापन उपलब्ध करा पाए. साथ ही विज्ञापनदाताओं और प्रकाशकों को बेहतर विज्ञापन तकनीक दे पाए". याहू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेरी यंग का कहना है, “हमारा मानना है कि खोज और प्रदर्शन का संयोजन ही आने वाले दिनों में सबसे बड़ी चीज़ होगी."
शुरुआत में ये समझौता चार साल के लिए होगा.

हिंदुस्तान की बारी

इस वर्ष चंडीगढ़ और देहरादून संस्करण क्रमशः अप्रैल और मई में लांच करने के बाद हिंदुस्तान अब जून में इलाहाबाद संस्करण लांच करने की तैयारी में जुटा है। इसके साथ-साथ ही यह मीडिया हाउस अपने प्रोडक्ट को अपडेट करने की कवायद में लगातार लगा हुआ है। अभी पिछले ही दिनों इसने लेआउट में फिर से बदलाव किया था और अब एक नई घोषणा इस मीडिया हाउस ने की है,वो है हिंदुस्तान अखबार को नौजवान रंग-रूप देने के साथ उसकी जबरदस्त आक्रामक ब्रांडिंग करने की। मतलब, हिंदुस्तान फिर बदलेगा!
एचटी मीडिया लिमिटेड अब हिंदुस्तान की बारी है, अब हिंदुस्तान की तैयारी है के नारे के साथ एक आक्रामक विज्ञापन और ब्रांडिंग अभियान जून माह से शुरू कर रहा है। इस अभियान को टीवी, अखबार, रेडियो, आउटडोर आदि माध्यमों पर लांच किया जाएगा। ताजातरीन जो आईआरएस डाटा आए हैं उसके मुताबिक हिंदुस्तान देश का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ अखबार है। इस तेजी को और ज्यादा तेज करने की पूरी रणनीति हिंदुस्तान प्रबंधन ने बनाई है। एचटी मीडिया के मार्केटिंग सेक्शन के एक अधिकारी के मुताबिक पचास फीसदी भारतीय आबादी कहीं न कहीं हिंदी भाषा का इस्तेमाल करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए हिंदुस्तान अखबार ने बाजार में अपनी घुसपैठ और ज्यादा बढ़ाने की रणनीति तैयार कर ली है और इसकी शुरुआत इसी जून माह से हो रही है।
हिंदुस्तान प्रबंधन का मानना है कि भारत की वैश्विक होती नौजवान आबादी की जरूरतों, चाहतों को पूरा करने के लिए अखबार अपने समस्त स्वरूप और ढांचे को बदलने की तैयारी में है। कंटेंट, डिजाइन और प्रजेंटेशन, सभी को नए जमाने के हिसाब से बनाने की कवायद चल रही है।
प्रिंट मीडिया मार्केट में अब विस्तार के साथ साथ क्वालिटी की भी जंग शुरूर हो गई है, ऐसे लगता है। हिंदुस्तान की इस पहल के बाद दूसरे हिंदी मीडिया हाउस भी अपने कंटेंट, डिजाइन और प्रजेंटेशन को सुधारने के लिए जीतोड़ कोशिश करेंगे, यह तय है।
भड़ास