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सत्य घटना: ट्रेनों में रहें सतर्क...नहीं तो...

घटना कल शाम की है भोपाल से वापसी के समय जोधपुर भोपाल से अशोकनगर जाना उचित समझा यह गाड़ी शाम 5:25 पर भोपाल रेलवे स्टेशन से चलती है और लगभग 10:00 बजे तक अशोकनगर पहुंचा देती है। स्टेशन पहुंचा तो 5:10 से ऊपर का समय हो चुका था। जनरल डिब्बों में अधिक भीड़ होने के कारण रिजर्वेशन वाले डिब्बे में जाना उचित समझा क्योंकि मेरे पास टिकट साधारण यात्रा का ही था फिर भी यह सोच कर कि जब टीटी आएगा तो उसको अनुरोध करके डिफरेंस बनवाकर कोई ना कोई सीट या जगह बैठने के लिए ले लेंगे। गाड़ी का सतही तौर पर भ्रमण करने पर s3 मैं सीट नंबर 71 पर बैठ गया वह सीट खाली नजर आ रही थी अभी बैठा ही था की गाड़ी रेंगने लगी इस बीच में एक खाकी वर्दी पहने हुए पुलिस वाले सज्जन भी उसी सीट पर आकर बैठ गए।

मेरे सामने वाली सीट पर दो बुजुर्ग महिलाएं बैठी थी और उनके सामने वाली सीट पर एक दंपत्ति बैठे हुए थे जिनकी एक बिटिया भी जिसकी उम्र महज 12 या 13 वर्ष रही होगी यात्रा कर रही थी चूंकि TT नहीं आया था इसलिए मन में थोड़ी शंका थी कि वह आ जाए तो डिफरेंस बनवा लें और सीट पक्की कर लूं। मेरा रास्ता ज्यादा लंबा न था लेकिन फिर भी दिन भर की थकान के कारण मैं सोना चाहता था। ट्रेन में चलते-चलते सलामतपुर,गंजबासौदा, विदिशा और बीना तक का सफर कर लिया था लेकिन तब तक कोई टिकट देखने के लिए नहीं आया। वीना निकलने के बाद लोग अपने सोने की व्यवस्था बनाने लगे इतने में ही टीटी आ गया।

एक नंबर सीट से चेक करते करते जब तक 72वीं नंबर की सीट पर आया तब तक ट्रेन पिपरई तक पहुंचने वाली थी जैसे ही मैंने अपने साधारण टिकट दिखाइ तो उन्होंने पूछा कहां जाना है मैंने सोचा कि अगर इनको बोल दिया कि मुझे अशोकनगर जाना है तो यह अभी पेनल्टी बना देंगे इसलिए मैंने उनको बोला कि मुझे कोटा तक जाना है उन्होंने कहा फिर गुना में आपको सीट मिल सकती है। वहां की स्थिति देख कर ही बता पाऊंगा की सीट मिलेगी या नहीं मिलेगी तब भी आप डिफरेंस बनवा लीजिए।  मैंने कहा ठीक है बना दीजिए और मैंने अपनी जेब से पड़े हुए पैसे निकाले मेरे पास ₹12000 की समथिंग थे उन्ही में से मैंने एक नोट अचानक उनका मन बदल ओर उन्होंने कहा गुना चलकर बना दूंगा अभी रखे रहिए और इसी सीट पर बैठे रहना। अन्य लोगों की भी इसी तरह से टिकट चेक करते हुए वह दूसरे डिब्बे में चले गए।

हमारे सामने वाली सीट पर जो माताजी थीं उन्होंने अपना भोजन खोल लिया और हम सब को अपने साथ भोजन करने का ऑफर दिया लगभग सामने ना में सिर हिलाया तो उन्होंने दो केले निकालें और एक हमारे साथ बैठे हुए पुलिसवाले सज्जन को दे दिया दूसरा मुझे दिया और बोला यह खा लीजिए पुलिस वाले सज्जन ने आनन फानन में पूरा केला खा लिया मैंने अभी अपना केला खोला ही था कि मेरी नज़र एक बच्ची पर पड़ी वह मुझे देख रही थी मैंने आधा केला खुद खा लिया और आधा उस बच्ची को दे दिया इतने में अशोकनगर आ गया मैं गाड़ी से नीचे उतर आया।

भोजन को दरकिनार करते हुए मैं अपने घर तक आ गया। घड़ी की सुइयां 10:00 बजा रही थी और घर आकर मुझे ऐसा लगा जैसे चक्कर आ रहे हों

अभी बिस्तर पर बैठा ही था अचानक से मुझे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला जबकि सुबह मुझे दो बहुत महत्वपूर्ण आयोजनों में जाना था जो कि आज सुबह ही होने थे।  इसके लिए मेरे मित्र हितेंद्र बुधौलिया ने मुझे सुबह 3:30 बजे से ही फोन लगाने आरम्भ किये चूंकि मुझे सही मायने में होश नहीं था जिसका कोई असर मेरे ऊपर नहीं हुआ लगभग 3:30 बजे से लेकर 9:30 बजे तक उन्होंने मुझे फोन किए जब कोई प्रत्युतर नहीं मिला तो फिर उनके सब्र का बांध भी टूट गया और वह मेरे घर की तरफ चल पड़े।

कमरा अंदर से बंद था बार-बार दरवाजा खटखटाने पर भी जब नहीं खुला तो उनके होश फाख्ता हो गए उन्होंने पुलिस को फोन लगाने का मन बनाया उस से पहले बहुत तेज से दरवाजे पर तीन चार प्रहर किए जिससे मेरी तंद्रा टूटी और मैं एक झटके से खड़ा हुआ वह दरवाजा खोल दिया फिर उसके बाद उनके शब्दों प्रश्नों की बौछार मेरे ऊपर होने लगी लेकिन मेरी आंखें खुली होने के बावजूद भी मुझे कुछ दिख नहीं रहा था चारों तरफ धुंधला-धुंधला था जब मैंने उनको यह बात बताई तो उन्होंने कहा कि सुबह हो ज्यादा समय तक आंखें धो लीजिए और जैसे ही मैंने पानी से आंखें धोया उसके बाद ब्रश मुँह के अंदर रखा तो जैसे मुझे करंट लग गया हो मेरे पूरे मुंह में छाले के होंठ फट चुके थे होठ के ऊपर कई दाने निकल आए थे मेरी समझ में नहीं आ रहा था क्या हुआ डॉक्टर से सलाह करने पर यह पता चला कि मुझे जहर दिया गया है जब मुझसे पूछा गया कि आपने क्या खाया तो सिवाय उसके केले मैंने कुछ नहीं खाया था।

अब मेरा ध्यान ट्रेन में बैठी उन बुजुर्ग महिलाओं पर था मैं सोच रहा था कि उन पुलिसवाले सज्जन का क्या हुआ होगा जिन्होंने पूरा केला खाया उस बच्ची का क्या हुआ होगा जिसमें आधा केला खाया जब आधा केले में मेरी यह स्थिति है तो उनके साथ क्या गुजरा होगा मैं जाने अनजाने में जहरखुरानी का शिकार हो चुका था और स्थिति यह रही कि मैं पूरे दिन लगभग अनमना ही रहा।